इटावा। मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता निराश्रित गोवंशों को संरक्षित करने की योजना में जिला प्रशासन पलीता लगा रहा है। 75 न्याय पंचायतों में से अब तक 33 न्याय पंचायतों में ही गोशालाएं संचालित हो सकीं हैं।
योजना के शुरू हुए चार वर्ष का समय गुजर गया और प्रशासन निराश्रित 10,841 पशुओं में 5,658 गोवंश संरक्षित कर सका है। 5,183 गोवंश खुले में घूम रहे हैं। नगर के चौराहे, सड़कें व किसानों के खेत ही ठिकाना है। अन्ना मवेशियों के कारण कई बार हादसे भी हुए। हाल ही में चकरनगर में मवेशी से बाइक टकराने से एक युवक की जान चली गई थी।
प्रदेश सरकार ने हर न्यायपंचायत में एक गोशाला के संचालन के निर्देश दिए हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। चकरनगर ब्लॉक की संचालित पांच गोशालाओं में 300 से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ राहुल कुमार ने बताया कि आवारा पशुओं की संख्या अधिक है। उन्हें पकड़ कर संरक्षित करने के लिए पर्याप्त संसाधन मुहैया नहीं है।
महेवा ब्लॉक क्षेत्र की 91 ग्राम पंचायतों में मात्र छह गोशालाएं चालू हैं। इनमें 450 के करीब गोवंश हैं। ब्लाक के कई गांवों में बनी गौशालाएं बंद पड़ी हैं। एडीओ पंचायत श्याम वरन सिंह राजपूत ने बताया कि प्रत्येक न्याय पंचायत में एक गोशाला चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
भरथना विकास खंड की 18 गोशालाओं में अब तक पांच ही संचालित हैं। पाली खुर्द, जारपुरा, तुरैया व कुसुना में गोशालाएं ही चालू नहीं की गईं। वहीं नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित अस्थायी गोशाला में 176 गौवंश मौजूद हैं।
ईओ राम आसरे कमल के अनुसार डीएम के निर्देश पर निर्माणाधीन कान्हा गोशाला में गोवंशों को ले जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। महेवा ब्लॉक क्षेत्र में 18 में सात गोशालाएं ही चालू हैं।
नहर निरीक्षण भवन महेवा में बनी गोशाला पिछले छह माह से बंद है। सभी सुविधाएं मुहैया होने के बावजूद इसे संचालित नहीं किया जा रहा है। ताखा विकास खंड की बात करें तो यहां सात में से सिर्फ दो ही गोशालाएं संचालित हैं।