‘प्रदेश की सपा सरकार बर्बरता पर उतारू है। सरकार चाहती तो निषाद समाज के आंदोलनकारियाें से बातचीत कर समस्या का हल निकाल सकती थी लेकिन सरकार ने बर्बरता का प्रदर्शन करते हुए गोलियां चलवा दीं। एक होनहार बेटे को अपनी जान की कुर्बानी देनी पड़ी।’
ये बातें शुक्रवार को केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहीं। वह मडैया दिलीप नगर में गोरखपुर गोली कांड में मारे गए अखिलेश निषाद को श्रद्धांजलि देने पहुंची थीं। करीब दो घंटे तक वह गांव में रुकीं और परिजनों को सांत्वना दीं।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने प्रदेश की सपा सरकार पर जमकर निशाने साधे। कहा कि घटना की जितनी निंदा की जाए, कम है। मामले की जांच सीबीआई से कराने का प्रयास किया जाएगा। मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाने की कोशिश है। निषाद समाज को एससी में शामिल करने का प्रस्ताव कें द्र पर विचारधीन होने के संबंध में उन्होंने बताया कि गुमराह करने वाला प्र्र्र्र्र्र्रस्ताव है, संशोधित कर नहीं भेजा गया है।
साध्वी ने आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि प्रदेश में गुंडाराज चल रहा है। यह सरकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला कर रही है। शाहजहांपुर में एक पत्रकार को जिंदा जलाना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि एक मंत्री का नाम एफआईआर में शामिल होने के बाद भी उसे बचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वे गोरखपुर जाएंगी और जेल में बंद आंदोलनकारियों से बात करेंगी। दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए गृहमंत्रालय से बात की जाएगी। गांव जाते समय उन्होंने स्व. अखिलेश निषाद की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। साध्वी करीब दो घंटे तक रुकी उन्होंने मृतक के पिता आत्माराम से भी चर्चा की।
इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष गोपालमोहन शर्मा, प्रदेश मंत्री गीता शाक्य, डा. रमाकांत शर्मा, सावित्री क ठेरिया, ज्ञानेंद्र अवस्थी, सुभाष यादव, रामकुमार निषाद, एसडीएम भरथना एके मौर्य, तहसीलदार चकरनगर सुधीर कु मार आदि भी मौजूद रहे।
आडवाणी के बयान पर बोलीं, नो कमेंट
भाजपा के वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य लालकृष्ण आडवाणी के एक अखबार को दिए गए इंटरव्यू के बारे में पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कोई सीधा जवाब तो नहीं दिया बल्कि ‘नो कमेंट’ कह कर बात को टाल दिया।