इटावा की एसिड अटैक पीड़िता दो महिलाआें को तो सरकारी खजाने से तीन-तीन लाख रुपये की मदद मिली, लेकिन खुशबू को फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई। पांच साल के एक बेटे की मां खुशबू को उसके पति ने भी छोड़ दिया है और उसे अपनी मां के साथ जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। कांशीराम कालोनी स्थित जिस आवास में खुशबू अपनी मां के साथ रह रही है वह भी उसके नाम से आवंटित नहीं है।
एक अगस्त 2014 को खुशबू के ऊपर कांशीराम कालोनी में ही रहने वाले इमरान ने एकतरफा प्यार में पागल होकर तेजाब उड़ेल दिया था। खुशबू की गर्दन तथा उसके नीचे का हिस्सा बुरी तरह झुलस चुका है। जिला अस्पताल से सैफई और सैफई से उसे उपचार के लिए पीजीआई लखनऊ भेजा गया।
पिता रिक्शा चलाकर परिवार पालते हैं इसलिए इलाज में काफी परेशानी उठानी पड़ी। कुछेक लोगों को छोड़कर समाज के ठेकेदार भी खुशबू की मदद के लिए आगे नहीं आए। परिजनों को चंदा करके उसका इलाज कराना पड़ा। पूरा परिवार आर्थिक मदद की खातिर दर-दर भटकता रहा।
कई बार डीएम को ज्ञापन दिया गया तो कई बार मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेजा गया। बावजूद इसके सरकारी मदद एसिड अटैक पीड़िता को नहीं मिली। मां शब्बो का कहना है कि उसको अभी तक एक पैसे क ी भी सरकार से सहायता नहीं मिली है। उसके पति रिक्शा चला कर परिवार का पेट पाल रहे हैं।
खुशबू के पति ने भी उसे छोड़ दिया है। आठ महीने का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक खुशबू पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है। मुख्यमंत्री से मदद मिलने की उम्मीद थी जिले की दो एसिड पीड़ित महिलाओं को तो तीन-तीन लाख की मदद दे दी गई है, लेकिन उसकी बेटी को एक पैसा भी मदद नहीं मिली है।
जिला प्रशासन की ओर से सभी प्रकरण शासन के पास भेजे गए थे। संभवत: बजट के हिसाब से मदद दी गई है। जिनको मदद नहीं मिल पाई है उनके प्रकरणों को दिखवाया जा रहा है। इन्हें दोबारा से शासन के पास भेजा जाएगा। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।-डॉ. नितिन बसंल, जिलाधिकारी