कोरोना से जूझ रहे देश समेत पूरे विश्व को सैफई विश्वविद्यालय की रिसर्च में प्रमाणित राज निर्वाण बटी (आरएनबी) के रूप में संजीवनी मिली है।
विवि के कुलपति डॉ. राजकुमार ने सोमवार को दावा किया कि 40 मरीजों पर दवा का प्रयोग किया गया, जिसमें तीस मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।
प्रेसवार्ता के दौरान कुलपति ने बताया कि आरएनबी साइंटिफिक मेथोडोलॉजी के लेवल- 3 मानक के अनुसार विश्व की पहली एलोवैदिक दवा है।
इसमें कुल 12 आयुर्वेदिक दवाओं के घटक हैं। इस बटी पर तीन शोधपत्र जारी हो चुके हैं। इस दवा को साइंटिफिक कमेटी, इथिकल कमेटी और कोरोना कमेटी से अनुमोदन मिल चुका है। आईसीएमआर से भी जल्दी ही अनुमोदन मिलने की उम्मीद है।
कुलपति ने बताया कि राज निर्वाण बटी (आरएनबी) को 40 कोरोना संक्रमित मरीजों को आरएनबी सुबह-शाम 125 मिली ग्राम, पांच मिली ग्राम शहद के साथ दी गई। इससे 30 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए।
इसमें 26 मरीज ऐसे थे जिनकी पांचवें दिन ही रिपोर्ट निगेटिव आई। चार मरीजों की दसवें दिन रिपोर्ट निगेटिव आई।
इसके साथ इस आयुर्वेदिक दवा के साथ कोविड-19 अस्पताल में भर्ती सभी कोरोना संक्रमित मरीजों तथा कोविड-19 अस्पताल में कार्यरत सभी हेल्थ वर्कस को नियमित रूप से दी गई।
इसके साथ इन्हें राज निर्वाण काढ़ा (आरएनके) भी दिया गया। इसका बेहद सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। कुलपति का दावा है कि दवा के सकारात्मक प्रभावों को देखते हुए प्रदेश सरकार इसको प्रदेश के अन्य कोविड संक्रमित मरीजों पर प्रयोग करने की अनुमति देने का भी विचार कर रही है।
इस प्रयोग की खास बात यह भी है कि इन 30 कोरोना पॉजिटिव मरीजों में नौ 60 वर्ष से ऊपर आयु के थे। आठ मरीज ठीक हुए हैं जो किसी न किसी रूप में गंभीर बीमारी जैसे डायबिटीज, हार्ट, कैंसर से ग्रसित थे।
प्रो. राजकुमार ने यह भी बताया कि यह दवा वैश्विक मानकों के अनुसार लेवल 03 पर आती है तथा इस पर अभी रिसर्च चल रहा है। कोशिश की जा रही है कि मानक एक एवं दो पर लाया जाए ताकि विश्वस्तर पर इसका फायदा कोरोना संक्रमित मरीजों को मिल सके।
उन्होंने बताया कि यहां कोविड-19 अस्पताल में अब तक भर्ती कुल 134 कोरोना संक्रमित मरीजों में से 91 मरीज ठीक हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि देश में कोरोना की दस्तक के साथ ही विश्वविद्यालय ने इस संबंध में रिसर्च शुरू कर दिया था। अभी भी विश्वविद्यालय में कोविड-19 से संबंधित 20 शोधपत्र जारी किए गए हैं।
अधिकांश जल्दी ही प्रकाशित भी होंगे। इन रिसर्चों में यह देखा गया कि कोरोना शरीर के किन-किन हिस्सों पर पहले अटैक करता है, जिससे मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। इसके बाद प्राचीन चिकित्सा की उन दवाओं को छांटा गया जो इन सिस्टम के लिए कारगर है।
इसके इसके बाद प्राचीन दवाओं पर आधुनिक चिकित्सा में हुए शोधों को देखा गया। इस महत्वपूर्ण रिसर्च के लिए विश्वविद्यायल द्वारा विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य की मदद भी ली गई।
प्रेस वार्ता में योगिराज निर्वाण देव, प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत यादव, संकायाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार, कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा, ओएसडी शैलेंद्र कुमार यादव, अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह, नोडल अधिकारी कोविड-19 डॉ. रमाकांत रावत आदि उपस्थित रहे।