मुख्यमंत्री का गृह जनपद होने के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी कई सौगातें हैं जो अलविदा साल में अधूरी रह गई हैं। इनके नए साल में पूर्ण हो जाने की संभावना है। जिले में 24 परिषदीय विद्यालयों को स्टेट गवर्नमेंट से अनुमोदन मिल चुका है। केंद्र सरकार से राशि मिल जाने के बाद वर्ष 2015 में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
सैफई में 13.50 करोड़ की लागत से अभिनव विद्यालय बनना है। इसी प्रकार कृषि इंजीनियरिंंग कालेज कैंपस में फिसरीज व डेयरी में डिग्री पाठ्यक्रम भी जुलाई से शुरू होने की बात कही जा रही है। जिले के विभिन्न विकास खंडाें में 22 प्राथमिक तथा दो माध्यमिक विद्यालय खोले जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
विभाग ने सर्र्वे कराने के बाद प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेजी। प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है, लेकिन सर्व शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार से राशि न मिल पाने के कारण का शुरू नहीं हो पाया है। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि फरवरी 2015 तक परमीशन मिलने के बाद जुलाई तक भवनों का निर्माण करा दिया जाएगा।
नए स्कूल भवन और भी अच्छे बनेंगे। अब तक प्राथमिक विद्यालय के लिए चार लाख और जूनियर के लिए 6 लाख रुपये दिए जाते थे। अब यह राशि बढ़ाकर प्राथमिक के लिए 9.75 लाख प्रति भवन और जूनियर के लिए 18.59 लाख रुपये कर दी गई है। इस राशि में तीन कमरे, शौचालय और बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जाएगा। किचन के लिए अलग से 80 हजार रुपये दिए जाएंगे।
जिले को मॉडल स्कूल की सौगात तो नही मिल पाई, लेकिन मुख्यमंत्री के गांव सैफई में अभिनव विद्यालय खोलने की हरी झंडी मिल चुकी है। करीब 13.50 करोड़ की लागत से तीन मंजिला भवन बनेगा। निर्माण निगम प्रोजेक्ट बनवाकर जिलाधिकारी से अनुमोदन कर भेज दिया गया है।
इस बिल्डिंग में म्यूजिक हाल, इंडोर गेम, लाइब्रेरी, कंप्यूटर कक्ष भी होगा। भवन के लिए शिक्षा विभाग ने एक एकड़ जमीन की व्यवस्था कर ली है। इस विद्यालय में वह सब सुविधाएं रहेंगी जो एक बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूल में मिलती हैं। पाठ्यक्रम भी सीबीएसई का रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में दो ही अभिनव विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एक सैफई में, दूसरा लखनऊ में होगा।
वहीं, डॉ. भीमराव अंबेडकर कृषि इंजीनियरिंग परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से डेयरी तथा फिसरीज महाविद्यालय भवनों का निर्माण कराया गया है। उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम की धाराआें में संशोधन के कारण उक्त दोनो महाविद्यालय शुरू नहीं हो पाए थे।
बाधाएं दूर हो जाने के बाद प्रवेश शुरू करने की अनुमति मिल गई है। फिसरीज एवं डेयरी के लिए 40-40 सीटें दी गई हैं। बैचलर ऑफ फिसरीज तथा बैचलर ऑफ डेयरी में प्रवेश की प्रक्रिया जुलाई 2015 से शुरू हो जाएगी। इससे पहले भवनों का लोकार्पण कार्य की औपचारिकताएं भी पूरी कर ली जाएगी।