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मोबाइल से सूचना मिलती है और पुस्तकों से ज्ञान : हृदयनारायण

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फोटो संख्या 23 : विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे के शह? - फोटो : ETAWHA
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मोबाइल फोन ने हमारी संस्कृति को कुप्रभावित किया है। युवा किसी भी जानकारी के लिए मोबाइल फोन का बटन दबाते हैं लेकिन मोबाइल से केवल जानकारी मिल सकती है ज्ञान नहीं। ज्ञान केवल अध्ययन और पुस्तकों से ही मिलता है। ये बात विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने आईपीएस हरीश कुमार की पुस्तक इटावा कल आज और कल पुस्तक का विमोचन करने के बाद कहीं।
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विधानसभा अध्यक्ष ने इटावा (अब औरैया) में जन्मे हरीश कुमार की पुस्तक का विमोचन नुमाइश पंडाल के मंच से किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल ने पुस्तकों का चलन कुछ प्रभावित किया है लेकिन पुस्तक प्रेमी पुस्तक पढने की अपनी जिद पर हैं, वैसे ही जैसे हर हर प्रेमी जिद पर होता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पुस्तक में शब्द होते हैं, शब्द से पुस्तक बनती है, पुस्तकों से ज्ञान और विज्ञान मिलता है। हम अपने विज्ञान में थोड़ी संस्कृति मिलाएं तो देखते हैं कि हमारे पूर्वजों ने शब्द के माध्य्म से शिव की साधना की थी।
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दीक्षित ने गोपालदास नीरज की कविता शोखियों में घोल जाए थोड़ा सा गुलाब, उसमें मिलाई जाए थोड़ी से शराब कविता पढ़ी और कहा कि शायद नीरज जी ने शराब मिलाने मिलाने का तत्पर्य शब्दों में संस्कृति मिलाने को कहा है। दीक्षित ने कहा कि हमारी स्मृति ही हमारा ज्ञान है। स्मृति ही ज्ञान कहलाती है। हम करणीय और अकरणीय तत्व की सूची भी स्मृति में रखते हैं। उन्होंने कहा कि वैदिक काल और उससे पहले छपाई नहीं होती थी तब स्मृति को श्रुति में संजोया जाता था।
ऋग्वेद श्रुति पर ही आधारित रहा, बाद में इसे लिखा गया। श्रुति का मतलब साहित्य का सृजन करने वाला दूसरे को सुनाता था। इस तरह वह आगे बढ़ता था। गांधी के सत्याग्रह पर वर्णन करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि ये शब्द उन्हें टालस्टाय की पुस्तक से मिला। अंग्रेजी पुस्तक में पैसिव रजिस्ट्रेंट शब्द था, गांधीजी ने सहयोगियों से इसका अच्छा हिंदी शब्द सुझाने पर पुरस्कार का ऐलान किया था। इसी सुझावों से सत्याग्रह शब्द निकलकर आया।
इटावा कल आज और कल का वर्णन करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हरीश कुमार ने जो कुछ इस पुस्तक में लिखा है वह सरकारी गजेटियर में भी नहीं मिलेगा। लोकोक्तियां, विवाह में गाए जाने वाले लोकगीत, स्थानीय कहावतें और बीहड़ के डाकुओं के वर्णन के साथ उनकी चिट्ठयिां भी हैं।
पुस्तक में जो लोक गीत हैं वह सिनेमा में नहीं मिलेंगे। पुस्तक में लोकनीति से लेकर प्रीति रीति तक का एक साथ वर्णन है। हरीश ने पुस्तक में शोध किया है। जब वह पुलिस की नौकरी में रहकर ऐसा कर सकते हैं तो इटावा के युवा क्यों नहीं, उन्हें भी रचनात्मक कार्य करने के लिए आगे आना चाहिए। पुस्तक के अध्ययन के जुड़ाव का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मैं रात में देर तक पढ़ता हूं लेकिन जब अपने विधानसभा क्षेत्र से देर से लौटता हूं तो लगता है कि किताबें उलाहना दे रही हैं, किताबों के मोहल्ले में अपने घर में जाने पर पुस्तक से रिश्ता लगता है। कोई पुस्तक बहन की तरह लगती है तो कोई भाई की तरह।
उन्होंने कहा कि कोई पुस्तक अभद्र और खराब नहीं होते। हरीश कुमार ने कहा कि बताया कि पुस्तक में इटावा के देशज 180 मुहावरे, जनपद की 1000 शब्दावली, भारतीय हॉकी टीम के कप्तान, शकील अहमद, ओलंपियन देवेश चौहान,इटावा में पैदा हुए कवि गोपालदास नीरज का वर्णन,
जनपद में जन्मे प्रशासनिक सेवा के 450 अधिकारियों के नाम, मोबाइल नंबर, स्कूल, फोटो के साथ 84 चर्चित स्थल, पसंदीदा व्यंजन मठाआलू और बीहड़ के बागियों का वर्णन है। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे, सन्तोष त्रिवेदी, पूर्व मंत्री सुखदा मिश्रा, विधायक सदर सरिता भदौरिया, भरथना विधायक सावित्री कठेरिया ने भी संबोधित किया। इसके पहले राजकीय आश्रत पद्धति के बच्चों ने नृत्य कर स्वागत वंदन किया।
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