किसान से बात करते रेलवे एवं पुलिस विभाग के अधिकारी।
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थाना क्षेत्र के ग्राम अहलादपुर में मुआवजा की धनराशि मांग के मुताबिक न मिल पाने के विरोध में डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर रेल परियोजना का काम शनिवार को बंद रहा। करीब चार घंटे तक चली जद्दोजेहद के बाद अधिकारियों ने किसान को समझाकर काम शुरू कराया। इस दौरान मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा।
फ्रेट कारीडोर भारतीय रेल परियोजना के अंतर्गत निकल रहे रेल मार्ग में एक ही परिवार के क्षेत्रपाल, उमादत्त एवं शिवदत्त पुत्रगण हरिबाबू की 23 बीघा जमीन जा रही है। इस परिवार के लोग एक जुट होकर रेल मार्ग का विरोध कर रहे हैं। क्षेत्रपाल ने बताया कि उनकी 23 बीघा जमीन गांव के किनारे और आबादी क्षेत्र में है। जिस हिसाब से हमारी जमीन का मुआवजा आबादी जमीन के हिसाब से होना चाहिए। सरकार उन्हें खेती की जमीन के हिसाब से भी मुआवजा नहीं दे रही है। उन्होंने बताया की सरकार 82 हजार प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा दे रही है। जो उपजाऊ जमीन के हिसाब से बहुत कम है। शनिवार को सुबह जब रेलवे परियोजना से जुड़े अधिकारी मौके पर काम कराने पहुंचे तो किसान ने परिवार के साथ अपनी जमीन पर ही बैठकर काम रुकवा दिया। काम रुकने की जानकारी रेलवे के सेकेंड जूनियर इंजीनियर पंकज कुमार ने अपने अधिकारियों दी। उन्होंने एसएसपी इटावा को काम रुकने की जानकारी दी। एसएसपी ने मौके पर सैफई क्षेत्राधिकारी, बसरेहर, वैदपुरा,चौबिया,ऊसराहार के थाना प्रभारी सहित फोर्स भेजा। क्षेत्रपाल ने अपनी मांग रखते हुए बताया कि उनकी जमीन का मुआवजा आबादी जमीन के हिसाब से हो और आश्रितों को रेलवे में नौकरी मिले। अधिकारियों के समझाने पर करीब चार घंटे बाद कार्य दोबारा से शुरू किया गया।