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दहेज उत्पीडन के मामले में चार को दो दो साल की सजा

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इटावा। दहेज उत्पीडन के मामले की सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष पांडे ने 18 साल बाद चार लोगों को दोषी करार दिया। दोषी पाए जाने पर उन्होंने पति जेठ, देवर और देवरानी को दो-दो साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही पांच हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा न करने पर उन्हें छह साल की अतिरिक्त सजा भोगनी पड़ेगी।
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अभियोजन अधिकारी प्रभात श्रीवास्तव ने बताया कि जसवंत नगर थाना क्षेत्र के गांव नया नगला निवासी सविता देवी पुत्री राम सहाय की शादी वर्ष 2001 में फिरोजाबाद जिले के मोहल्ला रामनगर चंद्रवार गेट निवासी तहसीलदार सिंह के साथ हुई थी। सविता के परिजनों ने शादी में अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दहेज दिया था। लेकिन उसके ससुरालीजन इससे संतुुष्ट नहीं थे। ससुरालीजन 30 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर ससुरालीजनों ने उसका उत्पीड़न शुरू कर दिया। ससुरालीजनों ने उसके साथ मारपीट की। मारपीट में उसके चोटें आई।
सविता के मायके वालों ने ससुरालीजनों को समझाने का प्रयास किया लेकिन ससुरालीजनों पर कोई असर नहीं पड़ा। बाद में सविता देवी ने इसकी शिकायत एसएसपी से की। पुलिस ने कोई कार्रवाई न किए जाने पर सविता ने कोर्ट का सहारा लिया । कोर्ट के आदेश पर जसवंत नगर थाने में पति तहसीलदार सिंह जेठ बंगाली बाबू देवर मुखिया और देवरानी खरगो देवी के खिलाफ बीस अप्रैल 2004 को रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपपत्र कोर्ट में सुनवाई के लिए प्रेषित कर दिए।
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मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष पांडे ने की। उन्होंने पक्ष विपक्ष की दलीलों को सुना। लेकिन अभियोजन अधिकारी के द्वारा पेश की गई दलीलों को बचाव पक्ष के वकील कोर्ट को संतुष्ट नही कर सके। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पति तहसीलदार सिंह, जेठ बंगाली बाबू, देवर मुखिया व देवरानी खरगो देवी को दोषी करार देते हुए दो-दो साल की सजा और पांच हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।
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