इटावा। सिविल जज जूनियर डिवीजन, एफटीसी/न्यायिक मजिस्ट्रेट आरुषि शर्मा की कोर्ट ने बहू से मारपीट करने और जहर देकर जान से मारने की कोशिश के मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में पति, सास, ससुर और देवर समेत चार आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। यह मामला थाना सैफई क्षेत्र के ग्राम बियारी भटपुरा से जुड़ा हुआ था।
कोर्ट के अनुसार, पीड़िता चंद्रमुखी (अब मृत) ने सैफई थाना पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि उन्होंने अपनी पुत्री रूबी की शादी वर्ष 2009 को राहुल निवासी बियारी भटपुरा, सैफई के साथ की थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही पति राहुल, ससुर कमलेश कुमार, सास मंशा देवी और देवर ऋषि उसकी बेटी को प्रताड़ित कर रहे थे।
आरोप था कि 11 मई 2021 को ससुरालियों ने मिलकर रूबी को जहर देकर जान से मारने का प्रयास किया जिसके बाद वह गंभीर हालत में सैफई में भर्ती रही। मामले की सुनवाई के दौरान उस समय नया मोड़ आ गया जब मुख्य गवाह और पीड़िता रूबी खुद कोर्ट में अपने बयानों से मुकर गई।
रूबी ने कोर्ट में बयान दिया कि वह अपनी ससुराल में हंसी-खुशी रह रही थी। छोटी-मोटी बातों को लेकर वह अपने मायके चली गई थी। वहां लोगों के बहकावे में आकर उसकी मां चंद्रमुखी ने ससुराल वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवा दी थी। उसने कोर्ट को बताया कि ससुराल वालों ने उसके साथ कोई मारपीट या उत्पीड़न नहीं किया था।
उसने यह भी स्वीकार किया कि अब उसकी मां की मृत्यु हो चुकी है और उसका अपनी ससुराल से समझौता हो गया है। बुधवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से देखने के बाद सभी आरोपियों साजिशन फंसाए जाने का मामला पाया।
कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी पति राहुल, ससुर कमलेश कुमार, देवर ऋषि और सास मंशा देवी को धारा 498 ए और 323 आईपीसी के आरोपों से बरी करने का आदेश दिया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली।