लगातार ग्यारह दिन से पड़ रहे कोहरे के कारण जनजीवन के साथ ही आलू व सरसों की फसल में रोग की संभावनाएं बढ़ गई है। यदि इसी तरह और कोहरा पड़ता है तो आलू में झुलसा व सरसों में माहू रोग लग सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से रोग के बचाव के लिए दवाईयों का छिड़काव करने की सलाह दी है।
इस समय किसानों ने अपने खेताें में आलू, गेहूं व सरसों की फसल की बुबाई की है, लेकिन जिले में पिछले 11 दिनों से पड़ रहे कोहरे के कारण इन फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे है। लगातार गिर रहे कोहरे के कारण आलू की फसल में झुलसा लगने की संभावनाएं बढ़ गई है। इसके अलावा सरसों की फसल में माहू रोग लग सकता है। कृषि के विशेषज्ञों की माने तो यदि कुछ दिनों तक मौसम इसी प्रकार रहा तो आलू में झुलसा व सरसों में माहू लग सकता है। क्योंकि फसल को पर्याप्त धूप नहीं मिल रही है।
किसान फसलों के बचाव के लिए खेतों में नमी बनाए रखे इसके लिए वह फसल में हल्की सिंचाई करें।
इस बारे में कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डा. वारिसी ने बताया इस तरह का मौसम गेहूं की फसल के लिए अच्छा है। इसके साथ ही लगातार गिर रहे कोहरे के कारण आलू व सरसों की फसल में रोग लगने की संभावनाएं हैं। यदि कुछ दिन तक इसी प्रकार का मौसम रहा तो आलू की फसल में झुलसा लग सकता है। उन्होंने बताया झुलसा से बचाव के लिए किसान अपने खेत में डाइथेन-एम 45 के साथ कार्वन डाइजिम का छिड़काव करें। इसके अलावा माहू के रोग से बचेगी। डाइक्लोरावास का छिड़काव फसल को रोग से बचाएगा। उन्होंने बताया गेहूं में खरपतवार से बचाव के लिए सल्फोसल्फयूरान व बथुआ से बचाव के लिए मैटांनस्पोरान का छिड़काव करें।