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फर्जी एप व बेवसाइट बनाकर ठगी करने वाले गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार

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फोटो संख्या 42- सदर कोतवाली में पकड़े साइबर ठगों के साथ पुलिस - फोटो : ETAWHA
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इटावा। फर्जी एप व वेबसाइट बनाकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को कोतवाली पुलिस व एसओजी टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
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यह गिरोह रुपयों को डॉलर में बदलने का झांसा देकर ग्राहकों को अपने जाल में फंसाता था। इनके पास से पुलिस ने लैपटॉप, टैबलेट, चार मोबाइल व पासपोर्ट बरामद हुए हैं।
सीओ सिटी राजीव प्रताप सिंह ने सोमवार को बताया कि जनपद एटा के आगरा रोड द्वारिकापुरी निवासी यशोदा नंदन ने सदर कोतवाली में पांच मार्च को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें बताया कि वह दीवान इंटरनेशनल का साझीदार है।
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उसे एक मार्च को उसके साझीदार मोहम्मद सामीन ने पक्का तालाब पर बुलाया था। उसके पहुंचने पर कुलजीत सिंह व सौरभ शुक्ला नाम के व्यक्ति वहां मिले।
जिन्होंने ग्लोब-पे के माध्यम से कम कीमत पर ऑनलाइन रुपये को डॉलर में बदलने का झांसा दिया। वह उन दोनों की बातों में आ गया और उन्हें आठ लाख रुपये दे दिए। रुपये डॉलर में परिवर्तित नहीं होने पर उसे ठगी का अहसास हुआ।
उसने कुलजीत व सौरभ के मोबाइल पर फोन किया, तो वह नंबर बंद मिले। जबकि जिस वेबसाइट की बात कही थी, वह भी बंद थी। इस मामले में एसएसपी आकाश तोमर ने सर्विलांस व सदर पुलिस की दो टीम गठित की थी।
टीम ने मोबाइल नंबर, साक्ष्य व सर्विलांस की मदद से आरोपियों की तलाश की। सोमवार को पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर पक्का तालाब चौराहा के पास से पांच लोगों को गिरफ्तार किया।
पकड़े गए आरोपियों ने अपने नाम कुलजीत सिंह निवासी हरीहरगंज जनपद फतेहपुर, सौरभ शुक्ला निवासी हरबंशपुर सजेती जनपद कानपुर नगर, राजकुमार दिवाकर निवासी रामनगर फ्रेंड्स कालोनी, दीपक शर्मा निवासी नौरंगाबाद व चरन सिंह निवासी वीरनगर जनपद आगरा बताया हैं। इनके पास से लैपटॉप, टैबलेट, चार मोबाइल, चार चेक बुक व एक पासपोर्ट बरामद हुआ है।
विदेशाी हैकर्स के संपर्क में गैंग के सदस्य
गैंग के सदस्यों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह कई विदेशी डार्क बेव हैकर्स के संपर्क में रहते है, जो उन्हे सभी साइटों के उपयोगकर्ता का नाम व पासवर्ड उपलब्ध कराते है।
वह वास्तविक निवेशकों को 50 प्रतिशत की दर से विदेशी मुद्रा प्रदान करने का लालच देकर रुपयों की ठगी करते है। फर्जी तरीके से वास्तविक लेनदेन की रसीद जारी कर देते है। गैंग के सदस्यों ने दीवान इंटरनेशनल फर्म के मालिक के साथ आठ लाख रुपयों की ठगी स्वीकार की है।
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ब्लॉक चेन पर आधारित होता था लेनदेन
यह पूरा लेन-देन ब्लॉक चेन तकनीकी पर आधारित होता है। पुलिस से बचने के लिए गैंग के सदस्य बिटक्वाइन व डॉग क्वाइन जैसी क्रिप्टो करेंसी का उपयोग करते थे। जिससे पुलिस को इन पर नजर रखने पर काफी परेशानी होती है।
यह गिरोह आसानी से लोगों को झांसे में लेकर अपना शिकार बनाता है। सीओ सिटी ने बताया कि गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
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