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आग लगे तो जिंदगियां बचाना मुश्किल

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शहर के कुणाल होटल में आग से बचाव की व्यवस्था का जायजा लेते मुख्य अग्निशमन अधिकारी तबारक हुसैन - फोटो : ETAWHA
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इटावा। जिले में स्कूलों, अस्पतालों और व्यवसायिक भवनों में आग लग जाए तो जिंदगियां बचाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि ऐसे ज्यादातर भवनों में आग बुझाने के संसाधन ही नहीं हैं। अग्निशमन विभाग भी केवल नोटिस भेजने तक सीमित है। विभाग ने छह महीने में 1700 व्यवसायिक भवन स्वामियों को नोटिस भेजे , जिसमें केवल चार निजी स्कूलों ने अग्निशमन यंत्र लगाए हैं।
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अग्निशमन विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि तीन-चार प्राइवेट स्कूलों और इतने ही होटलों में फिक्स फायर फाइटिंग इंस्टालेशन यानि स्थायी अग्निशमन व्यवस्था है। अन्य व्यवसायिक भवन, स्कूल, अस्पताल, गेस्ट हाउस, होटलों में कोई सुविधा नहीं है। कुछ ऐसी गलियों में हैं जहां दमकल तक नहीं पहुंच सकती। इसके अलावा शहर में 204 निजी भवनों पर बगैर फायर सर्विस की अनुमति के टॉवर लगा लिए गए हैं। शहर में ऐसे भवनों की संख्या 150 है। इस साल विनियमित क्षेत्र में 97 नक्शा पास हुए जिसमें 40 नक्शे कॉमर्शियल हैं। इनमें किसी ने भी अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं ली गई। करीब छह गैस एजेंसियां के गोदाम रिहायशी इलाकों से हैं।
बाजार में तिकोनिया स्थित सुपर मार्केट जैसे कई अन्य व्यवसायिक भवन हैं, जहां आग से बचाव पर कोई स्थायी कदम नहीं उठाया गया है। ज्यादातर कोचिंग सेंटर घरों के बेसमेंट चल रहे हैं, जहां आग लगने पर बच्चों का निकलना मुश्किल है। सबकुछ जानते हुए भी अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन कोई सख्त कदम नहीं उठा रहा है। दूसरे शहरों में हादसों के बाद कुछ खानापूरी होती है फिर सब शांत हो जाता है।
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करीब 40 नर्सिंग होम, 51 चावल मिलें, 108 ऑटो मोबाइल के शोरूम, 54 आरा मशीनें, 150 पैथोलॉजी लैब, 101 ईंट भट्ठा, 120 मैरिज हॉल, 30 के करीब होटल, 55 कोल्ड स्टोरेज, 80 पंजीकृत कोचिंग सेंटर, 113 डिग्री कॉलेज, 30 सीबीएसई स्कूल, 324 इंटरमीडिएट कॉलेज, 512 जूनियर हाईस्कूल, 4 प्राइवेट आईटीआई संचालित हैं। इसके अलावा 100 से अधिक कोचिंग सेंटर, व्यापारिक शोरूम, क्लीनिक, ईंट भट्ठा, कोल्ड स्टोरेज, शिक्षण संस्थान, होटल, मैरिज होम, गैस एजेंसी, शॉपिंग कांपलेक्स भी हैं।
हाई रिस्क इमारतों का निरीक्षण लगातार जारी है। बुधवार को भी कई जगहों पर जाकर आग से बचाव की व्यवस्था चेक की है। जुलाई से दिसंबर तक करीब 1700 नोटिस भेजे जा चुके हैं। जवाब न मिलने पर रिमाइंडर भेजे जा रहे। अब उप्र अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम 2005 के तहत संबंधितों के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर करेंगे।
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- तबारक हुसैन, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, इटावा
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