इटावा। आबकारी आयुक्त ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए जसवंतनगर क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक विकास को निलंबित कर दिया है। निरीक्षक पर अपने अधीनस्थ के माध्यम से रिश्वत लेने और सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करने के गंभीर आरोप लगे थे जिसकी जांच के बाद विभाग ने यह कार्रवाई की है।
आठ अप्रैल को एंटी करप्शन टीम कानपुर ने सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में आबकारी निरीक्षक के कार्यालय में तैनात प्रधान सिपाही तहसीलदार सिंह को सात हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। यह रिश्वत सैफई के मोहनपुर निवासी उदय प्रताप से एक दुकान के मामले में मांगी गई थी।
विभागीय जांच में सामने आया कि निरीक्षक विकास ने जसवंतनगर की धनुआ कंपोजिट दुकान के निरीक्षण के दौरान जानबूझकर स्टॉक रजिस्टर में गलत तथ्य दर्ज किए थे। उन्होंने दुकान मालिक को लाइसेंस निरस्त करने की धमकी भी दी थी। साथ ही रुपये की मांग की थी। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने निरीक्षक को दोषी मानते हुए निलंबन अवधि के दौरान प्रयागराज मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है।