बचपन से ही आसमान में ऊंची उड़ान की तमन्ना रखने वाली उनकी बेटी मांटू (कल्पना चावला) आज देश-दुनिया के लोगों के दिलों में जीवित है। घर की दहलीज से नासा के स्पेश शटल तक का कल्पना का सफर हर पल उनकी आंखों के सामने रहता है।
देश की हर बेटी कल्पना की विरासत को आगे बढ़ाएगी और उसमें वह हमेशा उसके साथ होंगे। यह बात पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के पिता बीएल चावला ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान कही। वह इटावा महोत्सव में आयोजित विज्ञान मेले में स्कूली बच्चों से रूबरू होने आए हैं।
बातचीत के दौरान कल्पना की यादों में खोए पिता बीएल चावला बताते हैं कि उसको घर पर सभी प्यार से मांटू नाम से पुकारते थे। करनाल के माल टाउन स्थित उनके घर के ऊपर से जब फ्लाइंग क्लब के जहाज उड़ान भरते तो कल्पना हमेशा ही उससे जुड़े सवाल करती हुई उसमें सवारी की जिद करती।
इस पर उन्होंने उसे उसके भाई के साथ फ्लाइंग क्लब के जहाज में सैर कराई। यहीं से आसमान की ऊंचाईयों में पहुंचने की जिज्ञासा लिए कल्पना स्कूल में भी कागज के जहाज बनाकर उड़ाती थी। दूसरों की मदद को हमेशा तैयार रहने वाली कल्पना इसी जुनून के साथ आगे बढ़ी।
पंजाब इंजीनियरिंग कालेज में सभी के विरोध के बाद भी एरोनोटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। बी टेक करने के बाद जब विदेश भेजने में परिजनों का साथ नहीं मिला तो एक माह तक अपने ही कालेज में प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने लगी। इसके बाद जैसे ही घर से हरी झंडी मिली।
अमेरिका पहुंचकर आगे की पढ़ाई शुरू की और बचपन से दिल में संजोए अंतरिक्ष तक पहुंचने के सपने को साकार किया। पिता बीएल चावला कहते हैं कि कल्पना आज हम सब के बीच न होते हुए भी सभी के दिलों पर राज कर रही है और देश में कई कल्पनाएं तैयार कर चुकी है जो उसकी विरासत को आगे बढ़ाएंगी।
सुनीता विलियम्स की उपलब्धियों से भी वह बहुत प्रभावित है और चाहते हैं कि कल्पना की तरह वह देश की किसी और बेटी को स्पेश शटल से अंतरिक्ष की ऊंचाईयों को छूता देखें। इसके लिए उन्होंने करनाल में कल्पना चावला सेंटर आफ एक्सेलेंस शुरू किया है।
जहां कक्षा 09 से इंटर तक के छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ने के लिए टिप्स देने देश विदेश के जाने माने वैज्ञानिक पहुंचते हैं। साथ ही कल्पना और अंतरिक्ष से जुड़ी बातों को बताकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।