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आरक्षण बदल सकता है इटावा में राजनीति का खेल

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जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण तय हो चुका है। अब क्षेत्र पंचायत प्रमुखों और ग्राम पंचायत प्रधानों के पदों की आरक्षण सूची का इंतजार है। हालांकि आरक्षण की स्थिति साफ होने में अभी समय है। अनंतिम सूची दो मार्च को जारी होगी।
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परंतु 1995 से अभी तक अनारक्षित रहीं सीटों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करने की नीति से खलबली मची हुई है। ब्लॉक प्रमुखी की दावेदारी करने वाले उम्मीदवारों में भारी उथल पुथल है। अभी तक सामान्य या पिछड़ा वर्ग के संभावित दावेदार जिन ब्लॉकों से तैयारी कर रहे थे वहां अब आरक्षण की संभावनाओं ने सारे समीकरण उलट पुलट कर दिए हैं। सबकी निगाहें इस बार सैफई, जसवंतनगर और भरथना क्षेत्र पंचायत प्रमुख सीट पर लगी हैं। तीनों ब्लॉक ऐसे हैं जहां सपा के प्रभावशाली नेताओं को एकाधिकार रहा है। इस बार भाजपा सत्ता में है ऐसे में देखना यह है कि भाजपा इन परिवारों के एकाधिकारों को कहां तक चुनौती दे पाती है।
जिले में बढ़पुरा, चकरनगर, भरथना, ताखा, सैफई, जसवंतनगर, महेवा और बसरेहर कुल आठ क्षेत्र पंचायतें हैं। अधिकांश सीटों पर सपा का दबदबा कायम होता आया है। बढ़पुरा, महेवा और चकरनगर में भाजपा अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही।
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वर्ष 1994 में सैफई ब्लाक बनने के बाद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भतीजे रणवीर सिंह यादव पहले ब्लॉक प्रमुख बने। वे लगातार ब्लॉक प्रमुख रहे। 2001 में उनके निधन के बाद सैफई परिवार के ही धर्मेंद्र यादव ने यह सीट संभाली। धर्मेंद्र यादव के सांसद बन जाने के बाद रणवीर सिंह के सुपुत्र तेज प्रताप सिंह यादव ब्लॉक प्रमुख बने। वे भी जब मैनपुरी से सांसद चुन गए तो उनकी मां मृदुला यादव ब्लॉक प्रमुख का पद संभाल रहीं हैं। इसी तरह से जसवंतनगर में अब प्रसपा नेता प्रो. बृजेश यादव के परिवार का एकाधिकार रहा है। पहले उनके पिता रामपाल सिंह यादव उसके बाद स्वयं बृजेश यादव और अब उनके बेटे मोंटी यादव ब्लॉक प्रमुख हैं।
भरथना में पूर्व सांसद प्रदीप यादव का इस पद पर एकाधिकार रहा है। पहले वे स्वयं ब्लॉक प्रमुख रहे। अब उनके पिछले कई सालों से उनके भाई हरिओम यादव ब्लॉक प्रमुख हैं। बढ़पुरा और महेवा ब्लॉक ऐसे हैं जहां भाजपा के ब्लाक प्रमुख बने।
अभी तक बढ़पुरा अनु जाति, चकरनगर महिला सामान्य, भरथना अनारक्षित, ताखा अनु जाति महिला, सैफई ओबीसी, जसवंतनगर ओबीसी, महेवा अनारक्षित और बसरेहर ओबीसी के लिए आरिक्षत है। अब आरक्षण की प्रक्रिया चल रही है। शासन के निर्देशों के अनुसार 20 फरवरी से एक मार्च तक जिलाधिकारी के स्तर से आरक्षण सूची प्रस्तावित कर शासन को भेजी जाएगी। दो मार्च को आरक्षण सूची का प्रकाशन होगा। इसके बाद आपत्तियां आमंत्रित करने उनका निस्तारण करने के बाद 14 मार्च तक अंतिम प्रकाशन होगा। नया आरक्षण सपा और भाजपा के चुनावी गणित को बनाने और बिगाड़ने में काफी तक जिम्मेदार होगा।
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