इटावा। हमारे जीवन का पहला स्कूल मां होती है। विद्यालय के शिक्षक और समाज के जिम्मेदार व्यक्ति मिलकर छात्र और समाज का निर्माण करते हैं। समाज आज भी शिक्षक और छात्र के समन्वय पर आधारित है।
यह विचार भारत विकास परिषद मुख्य शाखा के गुरू वंदन छात्र अभिनंदन कार्यक्रम में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कानपुर डा.रिपुदमन सिंह ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज भी चंद्रगुप्त सरीखे शिष्यों का निर्माण करना चाणक्य जैसे शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है।
प्रांतीय महामंत्री ब्रह्मावर्त प्रांत अशोक त्रिपाठी ने कहा कि परिषद वर्तमान में अंतरा राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक सेवा के क्षेत्र में संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण के पांच स्तंभों का अनुसरण करते हुए 60 वर्षों से कार्य कर रही है।
प्रांतीय महामंत्री अशोक त्रिपाठी, शाखा संरक्षक जगदीश प्रसाद पाण्डेय, शाखा अध्यक्ष हरिदत्त दीक्षित, सचिव केके.त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष अश्वनी कुमार मिश्र, संयोजक कुलदीप अवस्थी, सह संयोजक ओम नारायण शुक्ल, प्रांतीय संरक्षक विवेक कुलश्रेठ, सह सचिव अत्रि दीक्षित आदि परिषद के पदाधिकारियों ने सरस्वती पूजन तथा दीप-प्रज्वलन कर सस्वर वंदे मातरम गायन के साथ कार्यक्रम प्रारंभ कराया। विवेक कुलश्रेष्ठ और बीके सिंह ने परिषद का परिचय कराया।
कार्यक्रम में 17 शिक्षकों को माल्यार्पण करके अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मान पत्र के साथ अलंकृत किया गया। इसके बाद 17 विद्यालयों के 33 छात्र-छात्राओं को मेडल के साथ प्रशस्ति पत्र, फाइल बैग आदि देकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वाले शिक्षक
टेसी टॉमी, प्रेरणा सिंह, महाराज सिंह, रेखा वर्मा, डा.प्रियंका पांडेय, दिनेश कुमार कुशवाहा, रश्मि श्रीवास्तव, केशवती गोयल, गजेंद्र सिंह सेंगर, शोभित कुलश्रेष्ठ, लोकेश सक्सेना, अर्जुन सिंह, दिनेश कुमार, कृष्णा तिवारी, मनीष यादव, केशव आनंद, सीमा पालीवाल
फोटो संख्या 02- सम्मानित होने वाली छात्राएं- फोटो : ETAWAH