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जमीन फाइनल न होने से अटका 132 केवी सब स्टेशन का निर्माण

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इटावा। शहर में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को निर्वाध बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित 132 केवी सब स्टेशन के निर्माण की योजना अभी फाइलों में ही अटकी पड़ी है। सब स्टेशन के निर्माण के लिए अभी तक आवश्यकतानुसार जमीन भी नहीं ढूंढी जा सकी है। जमीन का मामला तय हो जाने के बाद ही फाइल आगे बढ़ सकेगी। शासन स्तर पर इसके बाद ही इस प्रस्ताव पर विचार किया जा सकेगा।
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बढ़पुरा विकास खंड और इटावा शहर में विद्युत आपूर्ति के लिए 132 केवी सब स्टेशन की आवश्यकता है। भाजपा की सदर विधायक सरिता भदौरिया ने भी अपना विधानसभा क्षेत्र होने के नाते सबसे पहले 2019 में पछांयगांव क्षेत्र में इस सब स्टेशन को बनवाने के प्रयास किए। परंतु बढ़पुरा विकास खंड में इसके लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इस सब स्टेशन के निर्माण के लिए करीब 20 से 25 एकड़ भूूमि चाहिए। विद्युत विभाग के नियमानुसार यह जमीन विभाग को निशुल्क उपलब्ध कराई जानी है। इतनी जमीन एक साथ बढ़पुरा विकास खंड के पछांयगांव और उदी के बीच नहीं मिल सकी। इसके बाद मानिकपुर विसू के पास जमीन की तलाश की गई। विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता सहित अन्य अधिकारियों ने मानिकपुर विसू के पास जमीन देखी भी परंतु अभी तक उस जमीन को अंतिम रूप से विभाग को सौंपने पर कोई फैसला नहीं हो सका।
इटावा जिले की स्थिति
इटावा जिले में विद्युत आपूर्ति के लिए 220 केवी के भरथना एवं सैफई में दो सबस्टेशन हैैं। इनके माध्यम से 132 केवी के छह सबस्टशनों को जोड़ा गया है। ये सब स्टेशन सैफई, कुनैरा, ताखा, जसंवतनगर, भरथना और टकरूपुरा शामिल हैं। यह सब स्टेशन 33 केवी के कुल 54 सब स्टेशनों के माध्यम से आपूर्ति गांव गांव पहुंचाते हैं। इटावा जिले का पछांयगांव से लेकर उदी, इकदिल और इटावा शहर का हिस्सा ऐसा है जहां से 132 केवी का सब स्टेशन नजदीक नहीं है। इटावा शहर केे आपूर्ति देने वाला कुनैरा का 132 केवी का सब स्टेशन संतृप्त हैं। यहां कोई नया ट्रांसफार्मर लगवाने की जगह शेष नहीं है। ऐसे में इटावा के आसपास नया सब स्टेशन बनाने की जरूरत महसूस की गई।
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ये है समस्या
उदी से लेकर पछांयगांव तक का हिस्सा बीहड़ी क्षेत्र है। पछांयगांव और उदी में 33 केवी के सब स्टेशनों को 132 केवी कुनैरा से जोड़ा गया है। कुनैरा की आने वाली लाइन में ब्रेकडाउन होने की स्थिति में पेट्रोलिंग करने में बड़ी दिक्कत होती है। ब्रेकडाउन सही होने में वक्त लगता है। चूंकि इस क्षेत्र में खेती निजी और राजकीय नलकूपों की सिंचाई पर ही निर्भर है। इसलिए यहां किसानों को काफी दिक्कत होती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
अधिशासी अभियंता ट्रांसमिशन रजनीश शर्मा ने बताया कि शहर के पास मानिकपुर विसू के पास जमीन देखी गई है। मुख्य अभियंता ने मौके का मुआयना भी किया है। अभी जमीन को हैंडओवर होने की कार्यवाही शेेष है। जमीन का मामला फाइनल होने के बाद ही प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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