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30 घंटे से भी अधिक समय से अंधेरे में हैं 150 गांव

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फोटो संख्या 01- बकेवर विद्युत उपकेंद्र में 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर को सही करते कर्मचारी - फोटो : ETAWHA
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बकेवर(इटावा)। बकेवर स्थित विद्युत उपकेंद्र में इनकमिंग मशीन और 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर में आई तकनीकी खराबी शुक्रवार को पूरे दिन भी दूर नहीं की जा सकी। उपकेंद्र के रूरल फीडर से जुड़े करीब 150 गांवों की बिजली आपूर्ति 30 घंटे से ठप है। गांवों में लोगों के दिनचर्या से जुड़े काम बुरी तरह से प्रभावित हैं। कई गांवों में सिंचाई का भी संकट है।
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बृहस्पतिवार को बकेवर बिजलीघर में सुबह करीब 11 बजे पटिया फीडर की लाइन का तार अचानक टूटकर दूसरी लाइन पर गिर गया था। आपूर्ति में डबल फेस हो जाने बिजलीघर के मशीन रूम में आग लगने से फ़ॉल्ट हो गया। इनकमिंग मशीन जल गई। ग्रामीण क्षेत्र की आपूर्ति के लिए रखा 10 एमवीए का ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हो गया। बकेवर टाउन को छोड़कर क्षेत्र के समूचे ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति ठप हो गई।
गुरुवार देर शाम तक आपूर्ति को पटरी पर लाने के लिए काम चलता रहा। पूरी रात आपूर्ति ठप रही। शुक्रवार की शाम तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। अधिकारियों ने शुक्रवार को देर रात आपूर्ति बहाल होने की संभावना जताई। शुक्रवार को एसडीओ भूप सिंह व जेई वीरेंद्र सिंह मौके पर मौजूद रहकर टीम के साथ आपूर्ति बहाल के प्रयास में जुटे रहे। बिजली आपूर्ति न होने से ग्रामीण परेशान रहे। पानी से लेकर मोबाइल फोन चार्जिंग के लिए लोग परेशान रहे। घरों में सबमर्सिबल पंप बिजली न आने से नहीं चल पाए। लोग हैंडपंपों पर बाल्टी ले जाकर पानी भरते दिखे।
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एसडीओ भूपसिंह ने बताया कि फाल्ट ठीक करने का काम लगातार चल रहा है। 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर की तकनीकी कमी दूर कर दी गई है। अब तेल गर्म करने में चार-पांच घंटे लग जाएंगे। इस कारण शुक्रवार को रात करीब दस बजे तक ग्रामीण क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की संभावना है।
फसल की नहीं हो पाई सिंचाई
नहर और रजबहों में पानी का प्रवाह बंद होने पर ग्रामीण क्षेत्र के तमाम किसान अपनी फसल की सिंचाई निजी नलकूपों से कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को प्रात: 11 बजे से फाल्ट के चलते विद्युत आपूर्ति न आने से किसान गेहूं व आलू की फसल में सिंचाई नहीं कर पाए। लाइट गुल हो जाने से शुक्रवार को भी किसान सिंचाई नहीं कर सके। वहीं, आलू किसान श्यामू त्रिपाठी का कहना कि आलू की फसल में दवा छिड़काव व फसल की सिंचाईं नहीं हो सकी। दो दिन की मजदूरी का भुगतान जेब से करना पड़ रहा है।
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