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पुलिस की लापरवाही मे छिन गया परिवार का सहारा

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चकरनगर(इटावा)। बिठौली पुलिस की लापरवाही से हुई इतनी बड़ी वारदात में एक परिवार के जीने का सहारा छिन गया। बेटी के अस्मत पर हाथ डालने का विरोध करने वाले जिस पिता की हत्या हुई वह पत्नी, चार बेटों और एक बेटी का इकलौता खेवनहार था। परिजनों ने बताया कि बुधवार शाम पांच बजे दबंगों ने मृतक को पीटना शुरू किया तो 112 नंबर पर कॉल लगाई गई। नेटवर्क की समस्या से कॉल नहीं लगी तो आबादी से बाहर जाकर थाने के सीयूजी पर फोन किया गया। लेकिन पुलिस नहीं पहुंची और दबंगों ने पिटाई जारी रखी।
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परिजनों ने बताया कि मृतक के चार बेटे और दो बेटियां है। पाई-पाई जोड़कर किसी तरह उसने एक बेटी के हाथ पीले किए थे। बाकी बच्चों के पढ़ाई से लेकर उनका पेट भरने तक की जिम्मेदारी उसी के सिर थी। खेती के लिए जमीन न होने से कुछ साल तक गांव में रहकर मजदूरी करता रहा। लेकिन खर्च और जरूरतें बढ़ने के साथ गांव की मजदूरी से काम चलना दूभर हुआ तो नौकरी की तलाश में पड़ोसी प्रदेश एमपी पहुंच गया। वहां एक ढाबे पर बर्तन साफ करके परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहा था।
मित्र पुलिस नहीं पहुंची, जान बचाने के लिए दबंगों के पैर पड़े
परिजनों ने बताया कि शाम करीब छह बजे तक पुलिस नहीं पहुंची तो गांव के ही युवक का टेंपो करके घायल को अस्पताल लेकर निकले। लेकिन गांव के बाहर खड़े आरोपी पक्ष के लोगों ने रास्ता रोक लिया। कानूनी कार्रवाई करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देते हुए आरोपियों ने टेंपो आगे नहीं बढ़ने दिया। इस बीच पीड़ित पुलिस की राह देखते रहे। लेकिन जब उसके आने की उम्मीद नहीं बची तो पिता की जान बचाने के लिए आरोपियों को कोई कार्रवाई न करने का भरोसा दिलाकर उनके पैर पर गिरकर गिड़गिड़ाए। इसके बाद उन्होंने आगे बढ़ने दिया। परिजन उसे लेकर सीएचसी पहुंचे तब पुलिस आई। मामला गंभीर देख पुलिस ने आनन-फानन में एंबुलेंस मंगवाया और घायल को जिला अस्पताल ले गई। यहां घायल को देखते ही डॉक्टरों ने बताया कि सांसे थम चुकी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सिर पर गहरी चोट से काफी खून बह चुका था। समय से इलाज न मिलने की वजह से मौत हो गई।
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