इटावा। जिले में दो महीने से मुख्य विकास अधिकारी की कुर्सी खाली पड़ी है। विकास भवन में मुखिया का पद इतने समय तक खाली रहने का यह पहला मौका है। सीडीओ के न होने से दो महीने से जिले में विकास का पहिया जाम है। तमाम महत्वपूर्ण वित्तीय काम अटके पड़े हैं।
विधायक और सांसद क्षेत्र विकास निधि का करीब 10 करोड़ रुपया पड़ा हुआ है। सांसद और विधायक अपने नए विकास प्रस्ताव नहीं भेज पा रहे हैं। पुराने करीब दो दर्जन से अधिक प्रस्ताव वित्तीय स्वीकृति न मिलने से शुरू ही नहीं हो पा रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, बाल विकास पुष्टाहार योजना जैसी तमाम महत्वपूर्ण परियोजनाओं की फाइलें अटकी पड़ी हैं।
राजा गणपति आर करीब दो साल तक जिले में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर रहे। उनके कार्यकाल में ग्रामीण विकास की योजनाओं पर खूब काम हुआ। गांव गांव पार्क, स्टेडियम, विद्यालयों का कायाकल्प, नहरों की सफाई आदि के काम हुए।
उनके तबादले के बाद पंचायत चुनावों से ऐन पहले प्रेरणा सिंह को इस पर भेजा गया। पहले तो उनका सारा समय आदर्श आचार संहिता में चला गया। विकास योजनाओं की तमाम फाइलें अटकी रहीं।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद 22 मई से वे छह महीने के अवकाश पर चली गई। मई ,जून और जुलाई तीन महीनों से विकास भवन में विकास का पहिया रुका हुआ है। शासन ने अभी तक न तो यहां कोई पोस्टिंग की है और न ही वित्तीय अधिकार किसी को सौंपे है। जिला विकास अधिकारी दीनदयाल को केवल रूटीन काम के लिए चार्ज दे दिया है।
विधायक निधि का 8 करोड़ डंप
विधायक निधि की दो किश्तों में तीन तीन करोड़ रुपया मई से अब तक जा चुका है। वहीं एमएलसी भीमराव अंबेडकर की निधि भी यही आती हे। भाजपा विधायक सरिता भदौरिया का 52 लाख, विधायक भरथना सावित्री कठेरिया का 50 लाख और विधायक जसवंतनगर शिवपाल सिंह यादव की निधि का 40 लाख रुपया अस्पतालों आक्सीजन प्लांट और अन्य सुविधाओं के लिए तो रिलीज हो गया।
बाकी प्रस्ताव वित्तीय स्वीकृति के बिना फंसे हुए हैं। विधायक भरथना सावित्री कठेरिया के 10 प्रस्ताव, शिवपाल सिंह के 6 प्रस्ताव फंसे हैं। सरिता भदौरिया ने इसी वजह से कोई प्रस्ताव ही नहीं दिया है।
एमएलसी भीमराव अंबेडकर ने 25 लाख रुपये स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दिए है। बाकी एक करोड़ रुपया दूसरे जिले में ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है। शेष राशि भी डंप पड़ी है। विधानसभा चुनावों के लिए अब केवल छह महीने का वक्त रह गया है। ऐसे में अब विधायकों के सामने सबसे बड़ी समस्या विकास कार्यों के शुरू न हो पाने को लेकर है।
सांसद निधि का भी काम रुका
भाजपा सांसद डा.रामशंकर कठेरिया ने एक करोड़ की लागत के एक दर्जन प्रस्ताव दिए हैं। एक भी प्रस्ताव पर वित्तीय स्वीकृति जारी न हो पाने के कारण काम नहीं हो पा रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के कर्मियों को चार महीने से वेतन नहीं
स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वपूर्ण परियोजना जिले में ठप सी पड़ी हैं। सीडीओ न होने के कारण मिशन से जुड़े करीब 15 कर्मचारियों का चार महीने से वेतन नहीं मिला है।
यहां तक मिशन में अनुबंधित वाहनों को पेट्रोल पंप से उधार में डीजल मिलना बंद हो गया है। पेट्रोल पंप का बकाया डेढ़ लाख का भुगतान न होने से अब विभागीय वाहनों में डीजल तक के लाले पड़े हैं।
पंचायत चुनावों का भुगतान फंसा
जिले में पंचायत चुनावों में टेंट, सामग्री, खानपान, वाहनों का किराया आदि तमाम भुगतान रुके हुए हैं। करीब डेढ़ करोड़ की भुगतान पत्रावालियां लंबित पड़ी हैं। इनका भुगतान सीडीओ के हस्ताक्षर के बाद ही होगा। सीडीओ कब आएंगे कुछ पता नहीं। पंचायत चुनाव में काम करने वाले ठेकेदार इधर उधर चक्कर काट रहे हैं।
वार्षिक स्थानांतरण पर भी लगा रहा ब्रेक
पंचायत सचिवों, एडीओ सहित अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों के वार्षिक स्थानांतरण भी इस बार नहीं हो सके। चार साल से कर्मचारी स्थानांतरण खुलने का इंतजार कर रहे थे। जैसे तैसे शासन की नीति आई भी तब भी इसका लाभ किसी को नहीं मिल सका। कर्मचारियों में इससे बड़ी निराशा है।