सैफई। रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति का यह सामाजिक दायित्व है कि खुद रक्तदान करने के साथ-साथ अपने परिजनों, मित्रों व अन्य लोगों को भी स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करें। यह बात उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. रमाकांत यादव ने कही।
कुलपति बृहस्पतिवार को डॉक्टर्स डे पर विश्वविद्यालय की पैथोलॉजी, ब्लड बैंक व राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के सहयोग से आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर और कार्यशाला के उद्घाटन में मौके पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक की तरफ से डॉक्टर्स डे पर स्वैच्छिक रक्तदान की पहल से रक्तदान की मुहिम को सकारात्मक बल मिलेगा। इस मौके पर पैथोलाजी एवं ब्लड बैंक विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पिंकी पांडेय, ब्लड बैक से प्रशासनिक अधिकारी डॉ. विनीत चतुर्वेदी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभय सिंह, डॉ. श्वेता चैधरी, सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह, आर्थो विभाग के डॉ. सुनील कुमार, प्रशासनिक अधिकारी उमाशंकर मौजूद रहे।
शिविर में 42 लोगों ने रक्तदान किया। स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों में फैकेल्टी के सदस्य, छात्र-छात्राएं व स्टाफ शामिल है। सभी स्वैच्छिक रक्तदाताओं को ब्लड बैंक की तरफ से प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
‘बिल्डिंग ए फेयरर , हेल्दियर वर्ल्ड’ थीम पर मनाया गया डॉक्टर्स डे
विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार ने कहा कि हर वर्ष एक जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। इस वर्ष डॉक्टर्स डे की थीम ‘बिल्डिंग ए फेयरर , हेल्दियर वर्ल्ड’ रखा गया था। उन्होंने बताया कि स्वैच्छिक रक्तदान के लिए कोई भी स्वस्थ व्यक्ति विश्वविद्यालय के ब्लड बैंक में कभी भी संपर्क कर सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री की याद में मनाया जाता डॉक्टर्स डे
कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा ने कहा कि इस वर्ष डाक्टर्स डे कोरोना महामारी के मध्य आया है। ऐसे में यह दिन और भी खास बन जाता हैं। यह दिवस बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री व महान चिकित्सक डॉ बीसी रॉय के सम्मान में मानवता की सेवा में उनके योगदान को मान्यता देने के लिए मनाया जाता हैं।