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इटावा महोत्सव की तैयारी शुरू

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इटावा। एक दिसंबर से एक महीने तक चलने वाले इटावा महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस मनोरंजक प्रदर्शनी के सभी चौकों में साफ सफाई एवं मरंमत कार्य तेज हो गया है। कुछ खेल तमाशा वालों ने भी दस्तक दे दी है। प्रदर्शनी का हृदय स्थल कहे जाने वाले मुख्य चौक में स्थित फव्वारा को आकर्षक बनाने के लिए रंगाई-पुताई का काम चल रहा है। पूर्वी चौक जिसे बक्सा बाजार कहा जाता है का नजारा भी इस बार बदल गया है। बाजार में चाराें ओर इंटरलॉकिंग सड़कें बन चुकी हैं। साथ ही बीच में चबूतरे भी बनकर तैयार हो चुके हैं।
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वर्ष 1910 से लगातार लगती आ रही जनपद प्रदर्शनी एवं पशु मेला में समय के साथ काफी बदलाव आ चुका है। पंडाल न सिर्फ काफी ऊंचा हैं बल्कि मंच भी पक्का है। पिछले साल से नुमाइश परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है। पंडाल में पूर्व में आयोजित होने वाले अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन का स्थान बॉलीवुड नाइट ने ले लिया है। महीने भर तक दिन और रात में विभिन्न तथा हर वर्गों से संबंधित कार्यक्रमों के अलावा अखिल भारतीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
राष्ट्रीय पुस्तक मेला भी लगता है, जिसमें देश के कई नामी गिरामी संस्थान अपनी दुकानें लेकर आते हैं। प्रदर्शनी परिसर मुख्य चौक, फव्वारा चौक, विकास प्रदर्शनी, पूर्वीे बाजार, इंद्रा बाजार, माधव स्तंभ चौक, सोफ्टी बाजार, विनोद बाजार तथा खेल तमाशा स्थल में बंटा हुआ है। पंडाल में मंचीय कार्यक्रमों का आयोजन होता है। सभी बाजारों का अपना अलग महत्व है। जिलाधिकारी इटावा महोत्सव समिति के पदेन अध्यक्ष व एसडीएम सदर पदेन जनरल सेक्रेटरी होते हैं।
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प्रदर्शनी में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला जज के अस्थाई कैंप कार्यालय होते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से नि:शुल्क एलोपैथी, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है। विकास प्रदर्शनी में हाथ से बनाए गए सामानों की प्रदर्शनी लगाई जाती है प्रतिभागियाें को पुरस्कृत किया जाता है। प्रदर्शनी में चारों दिशाओं से लोग प्रदर्शनी देखने आ सकते हैं। इसके लिए चारों ओर प्रवेश द्वार बने हुए हैं। इनमें 1972 में बना विष्णु द्वार प्रमुख हैं। इनके अलावा संत द्वार, गणेश शंकर विद्यार्थी द्वार शामिल हैं। प्रदर्शनी में खजला और नानखटाई दर्शकों की खास पसंद हैं।
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