चंबल तट पर आचार्य प्रसन्न सागर, आचार्य सौभाग्य सागर व आचार्य सुरत्न सागर का मिलन
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इटावा। गुरु आचार्यश्री पुष्पदंत सागर से आचार्य पद मिलने के बाद पहली बार इटावा आए अंतर्मना आचार्यश्री प्रसन्न सागर का भव्य स्वागत किया गया। पांच वर्ष बाद इटावा के लोगों को फिर से प्रसन्न सागर की अगवानी का अवसर प्राप्त होने पर श्रद्धालुओं ने पाद प्रच्छालन और आरती उतारी। स्वागत के लिए जगह- जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे।
बरही अतिशय क्षेत्र के दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं के साथ आचार्य प्रसन्न सागर एवं मुनि श्री पीयूष सागर ने सुबह 6 बजे इटावा की ओर पद विहार किया। ढोल नगाड़ों और जैन ध्वनियों के बीच श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नशियां जी पहुंचने पर महिला मंडल और पुरुषों ने भव्य आगवानी की। नशिया जी में दर्शन करने के बाद आचार्य एवं मुनि श्री शहर की ओर रवाना हुए।
लालपुरा जैन मंदिर में प्रवेश करने के बाद आचार्य श्री ने कहा कि वाणी और व्यवहार ऐसा हो जो सबको मीठा लगे। वाणी से किसी को दुख न पहुंचे। अच्छी वाणी और व्यवहार टार्च के उजाले की तरह जीवन से अंधकार को दूर करता है। जीवन के पन्नों पर कुछ ऐसा लिखो कि जीवन को लोग किसी ग्रंथ की तरह पढ़े। इस दौरान साधु सेवा समिति महिला मंडल के पदाधिकारी समेत सकल जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।