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मनरेगा सहायक और लेखाकार के खिलाफ एफआईआर के आदेश

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इटावा। विकास खंड ताखा की 17 ग्राम पंचायतों में कागजों पर पौधरोपण कर 12 लाख रुपये के घोटाले में मनरेगा सहायक और लेखाकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश हुए हैं। सीडीओ ने यह कार्रवाई जांच टीम की रिपोर्ट आने बाद की है।
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ताखा की 17 ग्राम पंचायतों में कागजों पर पौधरोपण कर साढे़ बारह लाख रुपये हड़पने का मामला सामने आया था। इस पर मंगलवार को सीडीओ राजागणपति आर ने पहुंचकर जांच की। इसके बाद जिला विकास अधिकारी की अध्यक्षता में टीम गठित कर जांच करने को कहा। मौके पर मनरेगा सहायक शिवशंकर एवं लेखाकार धर्मेंद्र कुमार अनुपस्थित मिले। सभी पंचायतों के सचिवों ने लिखित बयान दर्ज कराया कि उन्होंने पंचायतों में पौधरोपण का कोई भी काम नहीं कराया है।
जिला विकास अधिकारी ने जांच रिपोर्ट में बताया कि पौधरोपणके लिए 16 ग्राम पंचायतों में वर्ष 2019-20 आईडी जनरेट है। 10 ग्राम पंचायतों में वर्ष 2020-21 की आईडी है। भुगतान में सचिवों ने कोई बिल वाउचर नहीं दिया है। लेखाकार ने अपने डिजिटल सिग्नेचर कर 12 जुलाई को अंतिम भुगतान के लिए बीडीओ को भेज दिया। बीडीओ ने भी उसी दिन भुगतान कर दिया। इससे जाहिर है कि मनरेगा सहायक शिवशंकर एवं लेखाकार धर्मेंद्र कुमार ने कूटरचित दस्तावेजों के सहारे ग्रीन वर्ल्ड नर्सरी एटा को दो किस्तों मे 5 लाख 95 हजार व साढे़ पांच लाख रुपये एवं प्रियंका ट्रेडर्स जसवंतनगर को 91590 रुपये का मनरेगा से भुगतान करा दिया।
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सीडीओ राजा गणपति आर ने जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बीडीओ ताखा को दोनों कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। बीडीओ ताखा को भी जांच में क्लीन चिट नहीं मिली है।
विकास खंड ताखा में कागजों पर पशुशेड बनाकर 154200 रुपये और 17 ग्राम पंचायतों में कागजों पर पौधरोपण घोटाले में ताखा खंड विकास अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। जिला विकास अधिकारी दीनदयालकी अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच समिति ने माना कि अंतिम भुगतान खंड विकास अधिकारी ताखा ने ही किया है। ऐसे में उनकी घोटाले में भूमिका और एक अधिकारी के तौर पर दायित्व सही नहीं पाए गए हैं।
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