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471 ग्राम पंचायतों में तैनात 130 सचिव आज से हड़ताल पर

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इटावा। जिले के ग्राम पंचायत और विकास अधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के बीच चल रही रार थम नहीं रही है। 471 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों का क्रियान्वयन करने वाले ग्राम पंचायत और विकास अधिकारी बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने में अब सिर्फ दो ढाई महीने का समय शेष बचा है। ग्राम प्रधानों के ऊपर पंचायतों के विकास का दबाव है। चुनाव सिर पर हैं और पंचायत सचिवों की हड़ताल ने प्रधानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
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ग्राम पंचायत और विकास अधिकारी संघ ने 14 अक्तूबर को सुबह 10 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का एलान किया है। जिले में केवल 130 पंचायत सचिव हैं। उन्हीं के ऊपर 471 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों का जिम्मा है। पंचायत अधिकारी संघ के अध्यक्ष प्रशांत पोरवाल का कहना है कि काम का इतना अधिक दबाव है कि बता नहीं सकते। उधर से वरिष्ठ अधिकारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं। एक एक पंचायत सचिव के पास छह छह पंचायतों का काम है। ऐसे में वे अपने काम के साथ कितना न्याय कर पाएगा समझने वाली बात है। ऊपर से उसके खिलाफ जब चाहें तब निलंबन अथवा वेतन रोकने की कार्रवाई कर दी जाती है। सामाजिक और मानसिक रूप से शोषण किया जाता है। उन्होंने बताया कि संगठन बुधवार से अपना आंदोलन शुरू करेगा। विकास भवन मेें एकत्रित होकर सभी कर्मचारी धरना देंगे।
उधर, ग्राम प्रधान संगठन के प्रांतीय पदाधिकारी कौशल किशोर पांडेय का कहना है कि ग्राम प्रधान पिछले दो साल से परेशान हैं। गांव के विकास का सारा पैसा कायाकल्प, जिम और पार्क बनाने में खर्च हो गया। गांव में नाली, खड़ंजा, पेयजल आदि की मूलभूत सुविधाओं पर कोई काम नहीं हुआ। कोविड काल में सारा बजट काट दिया गया। अब जैसे तैसे कुछ काम होने की उम्मीद बंधी थी। वह ग्राम पंचायत सचिवों की हड़ताल से टूट रही है। चुनावी साल है ऐसे में प्रधानों को काम करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को मामले का न्यायपूर्ण हल समय रहते निकाल लेना चाहिए।
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