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देश की सुरक्षा में भी सेंध लगा सकता था गिरोह में शामिल इंजीनियर

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जियो के टॉवर से सूचनातंत्र के सबसे महत्वपूर्ण और कीमती उपकरणों की लगातार हो रही लूट से कंपनी के एमडी खुद सक्रिय हुए। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने गिरोह के दस सदस्यों को गिरफ्तार कर जो खुलासा किया उससे सामने आया कि देश की सुरक्षा में भी सेंधमारी हो सकती थी।
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सेना के लिए सड़कें बनाने वाली एक एजेंसी का इंजीनियर कासगंज निवासी मनोज कुमार पाल गैंग का अहम सदस्य है। इसे सेना के कई महत्वपूर्ण रुटमैप की जानकारी है जो किसी भी समय लीक हो सकती थी। इतने बड़े गिरोह का पर्दाफाश करने पर सीएम से लेकर उच्चाधिकारियों ने इटावा पुलिस को शाबासी दी है।
एसपी क्राइम ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि सेना के लिए देश भर में सड़कें तैयार करने वाली एक एजेंसी का इंजीनियर मनोज कुमार पाल की गैंग में महत्वपूर्ण भूमिका थी। लूट के उपकरण देश के बाहर पहुंचाने से लेकर विदेशी खरीदारों से डील करने तक में मदद करता था।
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टीम के प्रमुख सदस्य पहले जियो के एजीएम रमेश से लोकेशन लेकर उपकरणों की छानबीन के लिए टॉवर और सर्वर रूम की रेकी करते थे। इसके बाद गैंग के अन्य सदस्य वहां के गार्ड और अन्य कर्मचारियों को मिलाकर वारदात को अंजाम देते थे।
पुष्पेंद्र को पकड़कर पुलिस ने पूछताछ की तो उसने बताया कि गैंग का मुख्य सदस्य राजेश पाल दिल्ली में कृष्णा एयर एक्सप्रेस नाम से कोरियर कंपनी चलाता है। चंदन पाण्डेय पूर्व में वोडाफोन कंपनी में बतौर इंजीनियर काम करता था। उसे टेलीकॉम सेक्टर की बारीकियां पता हैं।
उसने 2016 में मेरठ में वोडाफोन के सर्वर रूम से उपकरणों की लूट करवाई थी। इसके बाद कंपनी से निकाला गया था। रमेश उत्तराखंड में जियो का एजीएम है। उसे जियो के नेटवर्क के बारे में पूरी जानकारी रहती है। रमेश देश भर में लगे जियो के सर्वर रूम और लैन कार्ड समेत अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की लोकेशन चंदन को देता था।
चंदन और मनोज उपकरणों को लूटने की योजना बनाने से पहले विदेश के खरीदारों से डील करते थे। भारतीय बाजार में इसके ग्राहक न मिलने की वजह से अमेरिका में संपर्क बनाया था। लूट से पहले ही उपकरणों का सौदा हो जाता था। इसके बाद गैंग के बाकी सदस्यों को काम पर लगाया जाता था। लूट होने के बाद इसे दिल्ली, बंगलूरु, लखनऊ और मुंबई ले जाकर छिपाया जाता था। इसके बाद राजेश इसे कोरियर के माध्यम से यूएसए तक पहुंचाता था।
एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से 16 RSP कार्ड/LAN कार्ड/ प्रोसेसिंग कार्ड (जियो कंपनी), 6 CPAK कार्ड, 38 SFP कार्ड ( 10,40,80 KM ), 6 ONS-C2-WDM-DE-1॥HL कार्ड, GLH 40 कार्ड, 1 XFP 10 GLR कार्ड, 4 जूपीटर नेटवर्क 740 कार्ड, 2 A9K - MPA-FILR कार्ड बरामद हुए हैं। इसमें 4 वोल्ट के एक लैन कार्ड अमेरिका में 40 लाख रुपये तक मिलते हैं। पकड़े गए सभी उपकरणों की कीमत करीब तीन करोड़ रुपये है। इसके अलावा इनके पास से तीन लग्जरी कारें, चार असलहे और 20 क्रेडिट कार्ड बरामद हुए हैं।
एसएसपी ने बताया कि आरोपियों के खातों की फॉरेंसिक ऑडिट करवाई गई तो पे-पाल एप और अन्य माध्यमों से उनके विदेशी खातों में तीस करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन पाया गया।
इसमें दस करोड़ का ट्रांजेक्शन केवल इस साल किया गया है। उन्होंने बताया कि टीम के हाईप्रोफाइल सदस्य लेनदेन और अन्य डील के लिए गूगल के ब्राउजर की बजाय टॉर ब्राउजर इस्तेमाल करते थे जिसे ट्रेस न किया जा सके।
एसएसपी के मुताबिक चंदन, राजेश और पुष्पेंद्र की लोकेशन खंगाली गई तो लॉस एंजिल्स, पेरिस, कैलीफोर्निया समेत दुनिया के दर्जन भर देशों में पाई गई। इसके अलावा अलग-अलग महिलाओं के साथ उनकी कई तस्वीरें मिली। पता लगाया जा रहा है कि यहां वह केवल मौज मस्ती करने गए थे या यूएसए के अलावा इन देशों में भी उनके खरीदार बैठे हैं।
एसपी ग्रामीण ओमवीर सिंह ने बताया कि आरोपी बुधवार की रात आगरा और इटावा से लूटे गए उपकरण लखनऊ पहुंचने की फिराक में यहीं से होकर गुजर रहे थे। लगातार इनकी लोकेशन ट्रेस कर रही टीम ने भनक लगते ही डीपीएस स्कूल के पास से इन्हें दबोच लिया।
एसएसपी आकाश तोमर ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा से पहले कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था। कंप्यूटर और इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी में अच्छी जानकारी होने की वजह से उन्हें वारदात के बाद ही किसी इंजीनियर के गैंग में शामिल होने की आशंका हो गई।
उन्होंने केस वर्क शुरू किया और सर्विलांस सेल में बैठकर खुद आरोपियों की कुंडली खंगाली। आकाश ने बताया कि काफी बारीकी से छानबीन के बाद वोडाफोन के पूर्व इंजीनियर और जियो के एजीएम के बारे में जानकारी मिली। इसकी जानकारी जियो के एमडी को देने के साथ शासन को बताया गया।
एसएसपी का कहना है कि यह देश के सूचनातंत्र की सुरक्षा से भी जुड़ा मामला है, इसलिए गिरोह से जुड़े हर सदस्य तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने बताया कि यूएसए के बायर्स तक पहुंचने के लिए इंटरपोल की मदद ली जा रही है। इसके लिए सीबीआई को भी जानकारी दे दी गई है। सीबीआई की मदद से जल्द ही विदेशी पकड़े जाएंगे।
प्रथम टीम- उप निरीक्षक सतेन्द्र सिंह यादव प्रभारी एसओजी, उनि वी.के. सिंह प्रभारी सर्विलांस।
द्वितीय टीम- जितेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी निरीक्षक थाना सिविल लाइन। टीम को एडीजी ने एक लाख, आईजी ने 50 हजार और एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम देेने की घोषणा की है। इसके अलावा डीजीपी के प्रशंसा चिह्न के लिए इनके नाम भेजे गए हैं।
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मनोज कुमार पाल पुत्र स्व0 राजेन्द्र सिंह निवासी नगला ऊसर थाना सहावर जनपद कासगंज ।
अर्जुन पाल पुत्र सुशील कुमार निवासी धनसुआ थाना कोतवाली जनपद फतेहगढ़।
राजेश कुमार पुत्र रमेश पाल निवासी डी 224 अली बिहार, थाना सरिता बिहार, नई दिल्ली ।
रोहित कुमार पुत्र विशनु कुमार निवासी ग्राम मलूक थाना मगोर्रा, जनपद मथुरा ।
रिषी पाल पुत्र राम सिंह निवासी पालमपुर सराय प्रयाग थाना गुरसहायगंज, जनपद कन्नौज ।
रोहित पुत्र जवाहर सिंह निवासी धनसुआ थाना कोतवाली, जनपद फतेहगढ़ ।
चंदन कुमार पांडे पुत्र रविन्द्र नाथ निवासी जी 1428 गौर स्पोर्ट्स वुड थाना सेक्टर 79, जनपद नोएडा।
रमेश पुत्र अशोक कुमार निवासी जी-1 223 कालिकाजी डीडीए फ्लैट, नई दिल्ली ।
पुष्पेन्द्र कुमार पुत्र राजवीर चाहर निवासी ग्राम मलूक थाना मगोर्रा, जनपद मथुरा ।
रामनरेश यादव पुत्र कुलप सिंह निवासी ग्राम चतुरीपुर थाना किशनी, जनपद मैनपुरी (सिक्योरिटी गार्ड)
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