जाम की समस्या से आम जनमानस तो त्रस्त है ही, सभासद
और चेयरमैन भी कम परेशान नहीं हैं। यहीं वजह है कि सेतु निगम द्वारा ठंडे
बस्ते में डाले गए एलिवेटेड पुल के निर्माण के लिए नगर पालिका ने बोर्ड
बैठक में प्रस्ताव पारित किया है।
इसमें निर्णय लिया गया कि पुल के
निर्माण को लेकर फिर पहल की जाएगी। नगर पालिका के इस प्रयास से शहरवासियों
में जाम से छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी है।
शासन की पहल पर सेतु
निगम ने करीब दो साल पहले शहर में एलिवेटेड पुल के निर्माण की संभावना को
तलाशने का काम किया था। कई मार्गों को आपस में जोड़ने वाले इस एलिवेटेड पुल
का सेतु निगम ने कड़ी मशक्कत कर नक्शा भी तैयार लिया था।
इस पर
करीब 90 करोड़ खर्च रुपये होने की उम्मीद जताई थी। सेतु निगम के एमडी आरके
श्रीवास्तव और मुख्य अभियंता विनय कुमार राकेश की हाई लेवल कमेटी से लेकर
डिजाइन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमों ने कई बार स्थलीय निरीक्षण भी किया
था, पर यह कवायद बेनतीजा रही। दरअसल जिस नाले के ऊपर से इस पुल को गुजरना
है, वहां के 112 मकानों की ऊंचाई पुल के निर्माण में बांधा बन रही है।
इन
मकानों को तोड़ने का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना था। जब कोई निर्णय
नहीं लिया गया तो सेतु निगम ने पूरी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
अब
फिर से नगरपालिका चेयरमैन कुलदीप गुप्ता संटू ने इस मुद्दे हवा दी है।
एलिवेटेड पुल के निर्माण की बांधा वे किस तरह दूर करेंगे, यह तो बाद में
पता चलेगा, पर इतना जरूर है कि पुल की उम्मीद को लेकर सुखद अनुभूति होने
लगी है।