सीएम के गृह जनपद के 212 गांव के लोगों को बिजली के
लिए अभी और इंतजार करना होगा। कारण इन गांवों तक बिजली पहुंचाने की जिस
कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह बीच में काम छोड़कर चली गई।
दक्षिणांचल
विद्युत वितरण निगम ने रीटेंडरिंग कर अब दूसरी कंपनी को काम सौंपा है। अब
नई कंपनी नए सिरे से काम करेगी। इससे इन गांवों में 2017 से पहले बिजली
पहुंचने की संभावना नहीं दिख रही है।
करीब दो साल पहले जिले को
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत चुना गया था। 122.38 करोड़
की इस योजना में 100 तक की आबादी वाले गांवों, मजरों और कस्बों में
विद्युतीकरण तथा विस्तारीकरण का काम होना था।
योजना के तहत जिले के
212 बिजलीविहीन गांवों का विद्युतीकरण तथा 1958 मजरों, कस्बों की नई
बस्तियों में विस्तारीकरण का काम होना था। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम
ने राजीव गंाधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का काम टेंडर प्रक्रिया के तहत
अरावली इंफ्रा पावर कंपनी नई दिल्ली को साैंपा था।
सितंबर 2016 तक
काम पूरा करने की समय सीमा तय की गई। कंपनी ने सितंबर 14 में सर्वे शुरू
किया। दिसंबर 2014 तक 250 से अधिक गांवों का सर्वे भी कर लिया था तथा कुछ
गांवाें के नक्शे भी तैयार कर लिए।
अचानक कंपनी ने बीच में ही काम
बंद कर दिया। इस पर दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने आनन-फानन में
रीटेंडरिंग की। अब ज्योति स्ट्रक्चर मुंबई को काम दिया गया है। कार्यादेश
जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। कंपनी को सर्वे और अन्य कागजी
कार्यवाही करने में अक्टूबर तक का समय लग सकता है।
विभागीय
अधिकारियों का मानना है कि काम करीब एक से डेढ़ साल लेट हो गया है। यानी
जिले के 212 गांवों को अभी बिजली का इंतजार करना होगा।
बीच मेें ही
काम छोड़ देने के कारण शासन ने अनुबंध के अनुसार अरावली इंफ्रापावर लि. को
तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड कर दिया है। इस दौरान वह किसी टेंडरिंग
प्रक्रिया में भाग नहीं ले पाएगी। इसके अलावा कंपनी की सिक्योरिटी राशि भी
जब्त कर ली गई है।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत
अरावली इंफ्रापावर को काम दिया गया था। कंपनी ने 250 गांवों का सर्वे पूरा
करने के बाद काम बीच में ही छोड़ दिया है। कंपनी को तीन साल के लिए
ब्लैकलिस्टेड कर सिक्योरिटी राशि जब्त कर ली गई है।
अब ज्योति
स्ट्रक्चर मुंबई को काम दिया गया है। बीच में ही काम छोड़ देने से गांव में
बिजली पहुंचाने का काम एक से डेढ़ साल तक लेट होे गया है। -धनीराम मौर्य,
अधीक्षण अभियंता, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि. इटावा।