इटावा। बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों में भेजी जाने वाली धनराशि का हिसाब किताब रखने के साथ ही उसका ब्यौरा भी सार्वजनिक करना होगा। इसके लिए विद्यालयों की दीवारों पर पूरा लेखा जोखा अंकित करना होगा। शासन ने कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। बेसिक शिक्षा निदेशक डा. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
अभी तक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बाउंड्रीवाल, फर्नीचर, बिजली पंखे, हैंडपंप, स्वेटर, यूनिफार्म, कंपोजिट ग्रांट, खेलकूद आदि मदों में धनराशि सीधे बीएसए कार्यालय से भेजी जाती है। यह ग्रांट कितनी भेजी गई, इससे क्या-क्या कार्य हुए इसका पता सिर्फ विभागीय अधिकारियों को ही रहता है। जनसामान्य को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती है। इस मामले में कई बार धन के सही ढंग से उपयोग नहीं करने की शिकायतें भी मिलती रहीं हैं।
शिक्षा निदेशक बेसिक ने आठ नवंबर को जिला स्तर पर वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 में परिषदीय विद्यालयों को विभिन्न मदों में मिलने वाली धनराशियों एवं उसके सापेक्ष किए गए कार्यों का अंकन विद्यालयों की दीवारों पर कराने का आदेश जारी किया है। यह भी सुनिश्चि करना होगा के अंकन विद्यालय की बाहरी दीवार पर हो, जिससे हर व्यक्ति उसका अवलोकन कर सके। शिक्षा निदेशक ने इस मामले मेें बीएसए से आदेश का अनुपालन करने संबंधी आख्या भी मांगी है। बीएसए अजय कुमार सिंह ने बताया कि आदेश प्राप्त हो गया है। सभी खंड शिक्षाअधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है कि वे अपने ब्लाकों के विद्यालयों में पिछले तीन वर्षों में दी गई धनराशि एवं उसके सापेक्ष कार्यों का ब्यौरा दीवारों पर अंकित कराएं। आदेश का अनुपालन न होने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।