शनिवार दोपहर अचानक कई लोगों को महसूस हुआ कि चक्कर आ रहा है, कोई सोच रहा था कि पैरों में कंपन हो रहा है लेकिन एक जैसा अनुभव होने पर उन्हें जब समझ आया कि यह तो भूकंप का झटका है तो एकबारगी सभी दहल गए।
धरती हिलने का पता चलते ही लोग घर-दफ्तर आदि छोड़कर खुले आसमान के नीचे भागकर आ गए। स्कूलों में सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को तत्काल कक्षाओं से बाहर निकाला गया। बाद में छुट्टी भी कर दी गई। हालांकि जिले में किसी भी तरह के कोई नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। बीहड़ी क्षेत्र के बाशिंदे भी झटकों से भयाक्रांत रहे।
इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे की फोन से जानकारी भी ली। हालांकि नेटवर्क में बाधा से वे काफी परेशान भी हुए। शनिवार की दोपहर करीब पौने बारह बजे जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए। करीब एक मिनट तक धरती कांपती रही। लोगों को जब भूकंप के झटकों की जानकारी हुई तो वह खुले आसमान की ओर भाग खड़े हुए।
हालांकि दूसरे झटका हल्का होने से ज्यादातर लोगों को इसका पता नहीं चला। धरती हिलने का पता चलने पर विकास भवन में भगदड़ मच गई। अफसर, कर्मचारी अपनी-अपनी सीट छोड़कर बिल्डिंग से बाहर निकलने के लिए भागने लगे। कुछ ऐसा ही हाल कलक्ट्रेट और अन्य सरकारी दफ्तर और जिला अस्पताल का रहा।
मरीजों को छोड़कर कई तीमारदार बाहर भाग खड़े हुए। कुछ ऐसा ही हाल जिले भर के विद्यालयों का भी हुआ। कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई कर रहे बच्चों को ग्राउंड पर खड़ा कराया गया। बाद में स्थिति सामान्य होने पर स्कूलों की छुट्टी कर दी गई। बाजारों में दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों से निकलकर बाहर खड़े हो गए।
भूकंप के यह झटके पूरे जिले में महसूस किए गए। आधा घंटा बाद पुन: भूकंप का झटका आने की चर्चाओं से दिनभर लोगों में दहशत रही। चौगुर्जी में फोटो स्टेट की दुकान किए अक्षत चौधरी ने बताया कि पौने 12 बजे उन्हें अपनी कुर्सी हिलने का आभास हुआ। उन्होंने गौर नहीं किया। सामने देखा तो कंप्यूटर भी हिल रहा था।
इस पर वह भागकर दुकान के बाहर आकर सड़क पर खड़े हो गए। जिला अस्पताल के सामने दुकान किए अरिहंतस्वरूप जैन ने बताया कि वह दुकान के बाहर खड़े थे, अचानक जमीन हिलती दिखाई दी। उन्होंने समझा कि उन्हें चक्कर आ रहे हैं। इसके बाद दुकान के अंदर का सारा सामान भी हिलता दिखा और आस पड़ोस के दुकानदार चिल्लाते हुए सड़क पर जमा हो गए। तब जाकर पता चला कि धरती हिल रही थी।
चकरनगर प्रतिनिधि के अनुसार, भूकंप के चलते बीहड़ी क्षेत्र के लोग दहशत में रहे। हालांकि इस प्राकृतिक आपदा से कोई जनहानि नहीं हुई। क्षेत्र के ज्यादातर लोगों ने कहा कि पहली बार उन्हें भूकंप के झटके महसूस हुए। शनिवार को सुबह करीब 11:40 बजे अचानक धरती हिलने लगी। घर में किसी टेलीफोन नीचे आ गिरा तो किसी का टीवी गिर गया।
दरवाजे और खिड़कियां हिलने लगी। भूकंप का ख्याल दिमाग में कौंधते ही लोग आनन-फानन में घरों से बाहर खुले स्थान की तरफ भागने लगे। ग्राम चौरेला निवासी महेश दुबे ने बताया कि कुछ देर के लिए लोगों में दहशत पैदा हो गई। ग्राम ददरा निवासी हरी कृष्ण तिवारी ने बताया कि उनके गांव के कुछ लोग चंबल नदी के किनारे थे। भूकंप के चलते चंबल में ऊंची लहरें उठने लगी थी।
जसवंतनगर प्रतिनिधि के अनुसार, शनिवार दोपहर में आए भूकंप के झटकों से पंखें, दीवार और रसोई में रखे बर्तन गिरने लगे तो लोग घर के बाहर भागे। झटके खत्म होने के बाद भी लोग घंटों घर में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
जसवंतनगर में भी भूकंप से घर के कपाट, फर्नीचर, दीवारें आदि हिल र्गइं। पालिका चेयरपरसन विमलेश यादव भी बाहर निकल गईं। इसके बाद देर रात तक भूकंप की चर्चा चलती रही।
भूकंप के झटकों से प्रशासन चौकन्ना
जिले में भूकंप के झटके लगने पर प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है। डीएम नितिन बंसल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। सीएमओ को निर्देश दिए कि वह आपात स्थिति में डाक्टरों की टीम, एंबुलेंस और पैरा मेडिकल स्टॉफ की उपलब्धता सुनिश्चित करते रखें।
उन्होंने विभिन्न विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड एक्सईएन जेसीबी, आयरन कटर और ऑपरेटर की व्यवस्था रखेंगे। एसएसपी राहत कार्य के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैयार रखेंगे। अग्निशमन अधिकारी सीड़ी के साथ मलवे में फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए तत्काल उपकरण उपलब्ध कराएंगे।
डीएम ने मुख्य पशुचिकित्साधिकारी से पशुओं के चारे एवं घायल पशुओं के इलाज के टीमें तैयार रखने को कहा। जिला पूर्ति अधिकारी को आपदा में फंसे लोगों के लिए भोजन व्यवस्था सुलभ कराने का दायित्व सौंपा। नगरपालिका ईओ के स्तर से राहत कार्य के लिए आवश्यक उपकरण, श्रमिक एवं पेयजल टेंकर की व्यवस्था रहेगी।
जिला पंचायतराज अधिकारी श्रमिकों से संबंधित व्यवस्था करेंगे। बिजली विभाग के दोनों एक्सईएन राहत कार्य के समय प्रशिक्षित कार्मिकों एवं उपकरणों की व्यवस्था करके विद्युत सप्लाई सुनिश्चित रखेंगे।
इन अधिकारियों के अलावा डीएम ने अन्य विभागीय अधिकारियों को अपने उपलब्ध यांत्रिक एवं आपदा उपयोगी सामग्री को तैयार रखने के निर्देश दिए। आपदा की स्थिति में एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह की अध्यक्षता में निगरानी समिति कार्य करेगी।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए कैपेसिटी बिल्ंिडग प्रोग्राम के तहत जिले की 120 ग्राम पंचायतों में जन सामान्य को विभिन्न प्रकार की आपदाओं से बचाव करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। जिसमें तहसील इटावा की 35, भरथना की 14, सैफई की 10, जसवंतनगर व चकरनगर की 20-20 एवं तहसील ताखा की 21 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
बचत कार्यालय की दीवार में आई दरार
भूकंप से अभी तक कोई जनहानि होने की सूचना तो नहीं मिली है लेकिन बचत कार्यालय की दीवार में दरार आने की जानकारी मिली है जिस वक्त भूकंप आया, उस समय अधिकारी और कर्मचारी अपने अपने दफ्तरों में कामकाज में मशगूल थे। जिला समाज कल्याण अधिकारी एनपी गुप्त पेंशन प्रकरण निपटा रहे थे।
तभी कर्मचारियों ने बदहवास सी स्थिति में आकर दफ्तर से बाहर निकलने को कहा। इसी तरह विकास भवन में भी अफरातफरी मच गई। सीडीओ डा. अशोक चंद्र समेत तमाम कर्मचारी बाहर खुले में आ खड़े हुए। एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह नगरपालिका में मौजूद थे। यहां कर्मचारी भागने लगे तो उन्होंने हिम्मत बांधी।
सहायक बचत निदेशक प्रभात मिश्र भी कचहरी स्थित अपने कार्यालय में मौजूद थे। शाम के वक्त जब आफिस बंद करने के लिए दरवाजा मोड़ा तो वह अटकने लगा। देखा तो दीवार में दरार नजर आई। बकेवर क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए। लोग हड़बड़ा कर बाहर की ओर भागने लगे थे।
झूले से गिरकर बच्ची घायल
जिस वक्त भूकंप आया उस समय शहर के मोहल्ला आजादनगर टीला में गुलजार अली की एक वर्षीय बेटी नौशान झूले में लेटी थी। मां नरगिस का कहना है कि जमीन हिलने से झूला गिर पड़ा जिससे बेटी नौशीन घायल हो गई।