दिन चढ़ते ही सूरज की गर्मी से धरती गर्म तवा बन जाती है और हवा जैसे आग उगल रही है। बुधवार को भी कुछ ऐसा ही हाल रहा। अधिकतम तापमान 43.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
दोपहर में लू के थपेड़ों ने लोगों को झुलसा कर रख दिया। कूलर व पंखे की हवा बेअसर रही। गर्मी से सबसे ज्यादा परेशान राहगीर हो रहे हैं। घरों, दफ्तरों और अस्पतालों में भी लोग पसीना से तर-ब-तर हो रहे हैं। रात में भी लोगों को भीषण गर्मी से राहत नहीं मिल रही है।
सूरज की तपिश कम होने का नाम नहीं ले रही है। मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। डायरिया आदि के चलते कई बच्चों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
सीएमओ राजकुमार नैयर ने बताया कि अस्पताल में इंजेक्शन और दबाएं आदि मौजूद हैं। डायरिया से पीड़ित आने वाले बच्चों और बड़ों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मौसम बहुत खराब है इसलिए धूप में बच्चों को बाहर न जाने दें। अगर बहुत जरूरी हो तो शरीर को कपड़े से ढक कर ही निकलें।
बच्चों को पानी उबालने के बाद ठंडा कर के पिलाएं। सलाह दी िउल्टी दस्त होने पर उसे इलेक्ट्राल या ओआरएस का घोल दें। अगर यह घर में न हो तो उसे नीबू-चीनी का घोल पिलाएं। शरीर में पानी की मात्रा कम न होने दें।
जिलाधिकारी नितिन बंसल ने लोगों से कहा कि निर्जलीकरण से बचाव के लिए अपने साथ भीगी तौलिया लेकर चलें। उन्होंने लू एवं तेज गर्मी से बचाव के लिए बताया कि पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और ठंडा जल पीने का प्रयोग करें, धूप से बचाव के लिए छतरी का प्रयोग करें, शरीर को पूरी तरह से ढक कर रखें, लंबे समय तक अधिक तेज धूप में न रहें।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सिर एवं शरीर को भीगी तौलिया से ठंडा करें, अधिक श्रम का कार्य न करें। सुबह खाली पेट घर से न निकलें, आवश्यकता पड़ने पर ओआरएस का प्रयोग करें, जहां तक संभव हो छाया में ही रहें, किसी प्रकार की तकलीफ या चक्कर आदि आने पर तत्काल इलाज कराएं।