जसवंतनगर। खेल प्रतिभाओं के लिए पहचान रखने वाला जसवंतनगर आधुनिक खेल मैदान के अभाव से जूझ रहा है। क्षेत्र के खिलाड़ी, विशेषकर छात्राएं, वर्षों से अभ्यास के लिए उपयुक्त मैदान न होने की समस्या झेल रही हैं। तहसील क्षेत्र से कई जनप्रतिनिधि मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे सर्वोच्च राजनीतिक पदों तक पहुंचे, लेकिन आज तक ऐसा खेल मैदान विकसित नहीं हो सका, जहां जिला, मंडल या प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा सकें। इसके चलते अनेक प्रतिभाएं संसाधनों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
तहसील क्षेत्र में दस से अधिक इंटर कॉलेज और छह डिग्री कॉलेज संचालित हैं, जहां हजारों छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन शिक्षण संस्थानों के खिलाड़ी समय-समय पर मंडल और प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक भी जीत चुके हैं। इसके बावजूद नियमित अभ्यास के लिए खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। मोहल्ला सिद्धार्थपुरी निवासी राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी कीर्ति बघेल ने बताया कि उन्होंने कबड्डी, खो-खो और एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर तक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। उनका कहना है कि जसवंतनगर में सुरक्षित खेल मैदान नहीं होने से नियमित अभ्यास करना मुश्किल हो जाता है। सैफई का खेल मैदान करीब आठ किलोमीटर दूर है, जहां प्रतिदिन आना-जाना सभी छात्राओं के लिए संभव नहीं है। यदि स्थानीय स्तर पर मैदान उपलब्ध हो जाए तो क्षेत्र की कई बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती हैं।
इसी तरह ग्राम रूकनपुरा की राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी जावित्री देवी, जो दो बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीत चुकी हैं, कहती हैं कि खेल मैदान का अभाव खिलाड़ियों के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। उनका मानना है कि नियमित अभ्यास के लिए बेहतर सुविधा मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र की कई प्रतिभाएं देश और प्रदेश का नाम रोशन कर सकती हैं। क्षेत्रीय विधायक एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने स्वीकार किया कि तहसील में खेल मैदान का अभाव है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि कस्बा क्षेत्र में खेल मैदान बने।