फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दान करने वालों से प्रसन्न होते हैं प्रभु

Thu, 16 Jul 2015 11:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
विज्ञापन
विज्ञापन
‘धन की सिर्फ तीन गति हैं- दान, भोग और नाश। इनमें दान सर्वश्रेष्ठ है। पुरुषोत्तम मास में परमार्थ के लिए दान करने वालों पर प्रभु प्रसन्न होते हैं।’ यह बात जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी बाल योगी श्री अर्जुनपुरी जी महाराज ने कही।
विज्ञापन


वह राहतपुर स्थित नेत्र चिकित्सालय परिसर में चल रही श्रीराम कथा के समापन पर भक्तों को समझा रहे थे। कथा के अंतिम दिन स्वामी जी का सम्मान किया गया। 

आयोजक संस्थाओं की ओर से डा. लक्ष्मपति वर्मा, वीके सिंह, अरविंद तिवारी ने 94 वर्षीय प. विमलेश, राजेंद्र द्विवेदी, पिलुआ मंदिर वाले महाराज जी, हरिद्वार से पधारी संगीत टोली के सर्वश्री प्रभुनाथ पांडेय, ज्ञान मिश्रा, वैजनाथ वैरागी, प्रदीप शुक्ला, योग गुरु प्रमोदानंद वेदांती को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि स्त्री का ममत्व और वात्सल्य रूप तब उमड़ पड़ता है जब वह पिता, पुत्र, पति आदि किसी को वह भोजन कराती है। भोजन कैसा भी हो उसका आदर करना सीखें, अनादर न करें। उसमें मीन-मेख न निकाले, तो बनाने वाला खुश और माता अन्नपूर्णा खुश, तब खोने वाले को उसका भरपूर लाभ और खुशी अवश्य मिलती है।
विज्ञापन


भगवान बेर जैसा फल खाकर भी शबरी के प्रेम और भक्ति में डूब कर यही सिखाते हैं। कथा के बाद स्वामी जी को लखनऊ रवाना किया गया। 

इस मौके पर डॉ. कैलाश तिवारी, श्याम सुंदर दीक्षित, राजेंद्र दीक्षित, डा. अशोक चौधरी, प्रमोद, विनोद दीक्षित, ममता चौधरी, आशा दुबे, राधा मोहन गुप्ता, महेश चंद्र तिवारी, विशुन नारायण शोरावाल, उपेंद्र तिवारी, सीके मिश्रा, डा. जीसी चतुर्वेदी, रमेश बिहारी लाल माथुर, विकास दीक्षित, धर्म सिंह चौधरी, मुकेश पाल आदि मौजूद थे। 
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें