जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को ‘सर्जरी’ की दरकार है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। 50-50 बेड वाले अस्पताल छैराहा और बकेवर के साथ ट्रामा सेंटर के भवन सालों पहले ही बनकर तैयार हो चुके हैं।
विभाग ने इन्हेें हैंडओवर भी कर लिया है लेकिन कई बार शासन को डिमांड भेजने के बाद भी डाक्टर तथा पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिल पा रहा है। इसी कारण अस्पताल चालू नहीं हो पा रहे।
गौरतलब है कि चार साल पहले छैराहा के पास 50 बेड का अस्पताल स्वीकृत किया किया गया था। शासन की ओर से 5.25 करोड़ रुपये खर्च कर भवन का निर्माण कराया गया है। करीब एक साल पहले अस्पताल बनकर तैयार हो चुका है।
शासन ने चिकित्साधिकारियों के 11 पद तथा पैरामेडिकल स्टाफ के 10, नॉन पैरामेडिकल स्टाफ के 35 पद भी स्वीकृत किए जा चुके हैं। सीएमओ स्तर से कई बार विभाग को डिमांड भी भेजी जा चुकी है लेकिन स्वीकृत पद अभी तक भरे ही नहीं गए हैं।
स्टाफ की अनुपलब्धता के कारण अस्पताल चालू नहीं हो पा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगाें को उपचार के लिए पांच किमी दूर जिला अस्पताल तक आना पड़ता है।
इसी प्रकार बकेवर में भी 7.12 करोड़ की लागत से 50 बेड वाले अस्पताल का निर्माण कराया गया है। साल भर से ज्यादा समय काम पूरा हुए हो चुका है। बकेवर अस्पताल के लिए शासन से 11 चिकित्साधिकारियों, 10 पैरामेडिकल स्टॉफ, 35 नॉन पैरामेडिकल स्टॉफ के पद स्वीकृत किए हैं, परंतु विभाग ने अभी तक पद नहीं भरें हैं।
नतीजा यह है कि यह अस्पताल भी चालू नहीं हो पा रहा है। यही हाल जिला अस्पताल परिसर में बने ट्रामा सेंटर का भी है। इस भवन का निर्माण सालों पहले पूरा हो चुका है। 13 चिकित्साधिकारी, 49 पैरामेडिकल स्टाफ, 12 नॉन पैरामेडिकल स्टाफ के पद स्वीकृत किए हैं।
ओटी तथा अन्य सामान खरीदने के लिए दो करोड़ रुपया भी सीएमएस के खाते में आ चुका है। मगर डाक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टॉफ के पद नहीं भरे जाने से ट्रामा सेंटर भी चालू नहीं हो पा रहा है।
इस संबंध में सीएमओ, डा. राजकुमार नैय्यर कहते हैं कि डाक्टरों के खाली पद भरने के लिए निरंतर वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में है, लेकिन प्रदेश व्यापी कमी के कारण समस्या है। मैंने हाल ही में चार्ज लिया है। बकेवर और छैराहे के अस्पताल शीघ्र ही चालू कराने का प्रयास है। रिम्स के निदेशक से भी हमने सहयोग मांगा है।
महिला अस्पताल के लिए भी डाक्टरों की दरकार
जिला अस्पताल परिसर में 19.40 करोड़ की लागत से 100 बेड के अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है। सीएमओ स्तर से 23 डाक्टर, 31 पैरामेडिकल स्टाफ, तथा 23 नॉन पैरामेडिकल स्टाफ की डिमांड एक साल पहले की जा चुकी है। साल भर के भीतर भवन तैयार होने की संभावना है। डाक्टरों की यदि ऐसी ही समस्या रही तो महिला अस्पताल का भी समय से चालू करने की उम्मीद नहीं है।