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जमीन जाने से विस्थापन की नौबत, लाखों का मुआवजा भी रुका

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इटावा/ताखा। कुरदौल गांव के किसान की बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में जमीन गई अब उन्हें गांव छोड़ने की नौबत भी बन आई है। दरअसल ज्यादा जमीन जाने के बाद भी कम मुआवजा मिलने से सेवानिवृत्त शिक्षक को गांव में जमीन नहीं मिल पाई। 40 किलोमीटर दूर जमीन खरीदी है, उसकी देखभाल के लिए अब गांव छोड़ने की नौबत बन गई है। सेवानिवृत्त शिक्षक के छोटे भाई को कम जमीन का अधिक मुआवजा मिला है।
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को ताखा तहसील क्षेत्र के कुदरैल गांव में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे में जोड़ा गया है। जिस जगह दोनों एक्सप्रेसवे जोड़े गए हैं वहां अधिक जमीन अधिगृहीत की गई है। कुदरैल के कृष्ण कुमार तिवारी की 36 बीघा और उनके छोटे भाई श्माम बाबू तिवारी की 28 बीघा जमीन भी एक्सप्रेसवे में गई है। कृष्ण कुमार को लगभग दो करोड़ और श्यामबाबू को लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये का मुआवजा मिला है। जमीन ज्यादा जाने के बाद भी कूष्ण कुमार को मुआवजा कम मिला। एक्सप्रेसवे की वजह से जमीनों के दाम भी तीन गुने बढ़ गए हैं। कम मुआवजा मिलने से रिटायर्ड शिक्षक कृष्ण कुमार गांव के आसपास जमीन नहीं खरीद पाए। करीब 40 किमी दूर इकदिल के पास जमीन खरीदी है। उनका कहना है कि इतनी दूर खेती की देखभाल नहीं हो पा रही है। इससे गांव से से विस्थापन की नौबत आ गई है।
सवा छह लाख मुआवजा अटका
कृष्ण कुमार ने बताया कि उनका लगभग छह लाख 25 हजार रुपये मुआवजा अटका भी है। अधिकारियों की कारस्तानी के चलते ट्यूबवेल, खेत पर बने भवन और कुछ जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि जमीन अधिग्रहण में जोर-जबरदस्ती भी की गई। खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिया गया था। टैक्स की दोहरी मार भी पड़ रही है।
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बढ़ गए जमीनों के भाव
कुदरैल के आसपास के किसानों ने बताया कि एक्सप्रेसवे बनने से पहले जमीन का भाव दो लाख रुपये प्रति बीघे तक था। अब छह से नौ लाख रुपये बीघा हो गया है। क्षेत्र में धान, आलू, गेहूं और लहसुन की खेती होती है।
स्तर सुधरा लेकिन पुश्तैनी जमीन जाने की कसक
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में श्मामबाबू की जमीन भी गई है। 73 वर्षीय श्यामबाबू ने बताया कि उन्हें 3.45 करोड़ रुपये मुआवजा मिला। ऐसे में इतनी बडी रकम का सही प्रयोग करना बडी जिम्मेदारी थी। जमीन जाने से भूमिहीन होने से झटका लगा। इससे तबियत भी खराब रहने लगी। धीरज रखा तो चीजें पटरी पर आने लगीं हैं। मुआवजे की रकम से लगभग 45 बीघा जमीन खरीद ली है। ट्रैक्टर खरीदा, पक्का मकान बनवाया और बच्चों के कहने पर कार भी खरीद ली है। सबकुछ मिला लेकिन पुश्तैनी जमीन जाने की कसक है। आगे की पीढ़ी को शिक्षित करके हम इसकी भरपाई कर रहे हैं।
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