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तबाह हुए 488 गांवों के 83,363 किसान

Sat, 21 Mar 2015 10:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल पर किस कदर कहर बरपाया है, यह कानपुर मंडलायुक्त के आदेश पर हुए आकलन से साफ हो गया है। शासन को भेजी गई इस रिपोर्ट में जिले के 488 गांवों के 83 हजार 363 किसानों की 50 फीसदी से अधिक गेहूं की फसल बर्बाद होना बताई गई है। पैमाइश के हिसाब से 15 हजार 78 हेक्टेयर में फसल चौपट हुई है। क्षतिपूर्ति के तौर पर शासन से 20 करोड़ 7 लाख रुपये की मांग की हुई है।
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अखिलेश सरकार ने किसानों के आंसू पोंछने के लिए डबल मुआवजा देने का ऐलान किया है। जिले में ओलावृष्टि से कितना नुकसान हुआ है, इसका आंकलन तो हो चुका है लेकिन इस सरकारी आकलन में सिर्फ 50 फीसदी से अधिक का नुकसान झेलने वाले किसान शामिल हैं। जिन किसानों को निर्धारित मानक से कम का नुकसान हुआ है, वे इस सरकारी गिनती में नहीं आए हैं।

राजस्व विभाग के तहत लेखपालों ने गाटा दर गाटा नुकसान का आकलन किया है। तहसीलवार जुटाए गए इन आंकड़ों को एडीएम के अधीन दैवीय आपदा पटल को सौंपा गया। इसमें साफ है कि ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान गेहूूं की फसल को हुआ है।
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सबसे अधिक नुकसान जसवंतनगर तहसील क्षेत्र में और सबसे कम भरथना क्षेत्र में हुआ है। जिले में कुल 705 राजस्व गांव हैं और किसानों की संख्या 146309 है। कुल आच्छादन एरिया करीब एक लाख हेक्टेयर है। इस लिहाज से करीब 65 फीसदी गांव ओलावृष्टि की चपेट में आए हैं और करीब 60 प्रतिशत किसान प्रभावित हुए हैं।

बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि में फसलों के नष्ट हो जाने पर एसडीएम हंसराज ने उन पीड़ित किसानों को सहायता राशि की चेकें बांटीं, जिनकी फसलें हाल की बारिश में तबाह हुई हैं। इस दौरान एक लाख नौ हजार रुपये की चेक वितरित की गईं।

लोहिया ग्राम आराजी सराय नगला बाबा के प्राथमिक विद्यालय में एसडीएम ने उन लघु किसानों को नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया। सर्वे में गांव के 87 किसानों को चिन्हित किया गया। इन सभी किसानों को चेक देकर सहायता राशि प्रदान की गई।

क्षेत्रीय लेखपाल व आरआई बालेश्वर प्रसाद ने बताया कि इसी प्रकार आसपास के कई और गांवों में सहायता दी जा रही है। यह सिलसिला तहसील के संपूर्ण क्षेत्र में चलेगा। इस दौरान लेखपाल लाल सिंह, ग्राम विकास अधिकारी उदल सिंह, एसएसआई सुधाकर के साथ ग्रामीण किसान मौजूद रहे।
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