विजिलेंस टीम ने एक माह पहले डिप्टी सीएमओ को 55 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था, पूछताछ में नाम कबूले
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए डिप्टी सीएमओ ने रिश्वत के हिस्सेदारों के नामों का खुलासा किया है। इनमें विभाग के 17 लोगों के नाम हैं, जिन्हें रिश्वत का हिस्सा दिया जाता था। इस खुलासे के बाद विभाग में खलबली मची है। कानपुर की विजिलेंस टीम हिस्सेदारों से जल्द पूछताछ कर सकती है।
कानपुर की विजिलेंस टीम ने 10 जून को डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव को सीएमओ कार्यालय स्थित दफ्तर से 55 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया था। सिविल लाइंस थाने में करीब चार घंटे की पूछताछ के बाद टीम उन्हें कानपुर ले गई थी। जहां अफसरों ने अलग-अलग कई बार पूछताछ की थी। इसमें रिश्वत लेने व कौन-कौन शामिल होने के बारे में पूछा गया था। 23 जून को टीम ने दोबारा जिले में आकर विभागीय अफसरों व कर्मचारियों से पूछताछ की थी। साथ ही डिप्टी सीएमओ दफ्तर का नजरा-नक्शा बनाया था। पूछताछ के दौरान डिप्टी सीएमओ ने विभाग के 17 लोगों के नाम लिए हैं। इसके बाद से विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची है। दूसरी ओर विभागीय अफसर मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
बता दें कि ऊसराहार निवासी नवीन कठेरिया ने पत्नी प्रिया के नाम से श्रीजी अल्ट्रासाउंड क्लीनिक खोलने के लिए आवेदन किया था। आरोप था कि है कि क्लीनिक के पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के एवज में डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव ने साढ़े तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत के 55 हजार रुपये लेते समय डिप्टी सीएमओ को पकड़ा गया था। इस मामले में सीएमओ डॉ. बृजेंद्र सिंह के मोबाइल पर संपर्क किया गया तो उनका फोन अर्दली ने उठाया और बताया कि सीएमओ साहब, कमिश्नर के साथ बैठक में शामिल हैं।
डिप्टी सीएमओ ने एक करोड़ की थी पेशकश
कानपुर विजिलेंस टीम ने डिप्टी सीएमओ को रिश्वत लेते ही गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही उनका मोबाइल फोन आदि जब्त कर लिया था। कार्यालय के एक कर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डिप्टी सीएमओ ने विजिलेंस टीम को सीढि़यों से उतरते समय एक करोड़ रुपये लेकर छोड़ देने की पेशकश की थी, लेकिन टीम उन्हें सिविल लाइंस थाने लेकर पहुंची थी।
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डिप्टी सीएमओ को किसी पर नहीं था भरोसा, 60-40 का रहता था बंटवारे का अनुपात
डिप्टी सीएमओ के पास अस्पताल व पैथोलॉजी के पंजीकरण का चार्ज था। नवीन पंजीकरण व पैथोलॉजी खोलने पर मोटी रकम संचालकों से वसूली जाती थी। डिप्टी सीएमओ इस मामले में किसी अन्य कर्मी पर भरोसा नहीं करते थे। वह स्वयं या उनके दो खास लोग थे, जिनके माध्यम से वसूली की धनराशि आती थी। इसके बाद 60-40 के अनुपात से इसका बंटवारा हो जाता था।