वसंत महोत्सव के तहत यहां खटखटा बाबा कुटी परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भागवताचार्य ने कहा कि पशुओं के अंदर एक कमी होती है, लेकिन मनुष्य के अंदर सारी कमियां विद्यमान रहती हैं। सृष्टि की रचना भारत में ही हुई। यहीं से लोग सारी दुनिया में फैले। भगवान का स्मरण करना ही मृत्यु को टालना है।
आचार्य मनमोहन गोस्वामी ने कहा कि हिरन कान का कच्चा होता है। बहेलिया सारंगी बजाता है और हिरन भागा चला आता है और बहेलिया उसे पकड़ लेता है। पतंगा आग के चक्कर में फंसता है। वह दीपक को देखता है और वहां पर पहुंचकर उसमें जल जाता है। नाक के कारण भौरा फंसता है।
वह खुशबू सूंघते हुए आता है और भंवर जाल में फंस जाता है। जीभ के कारण मछली फसती है। वह खाने की वस्तु देखकर उधर लपकती है और शिकारी का कांटा उसकी जीभ में फंस जाता है। उन्होंने कहा कि सारी कमियां मनुष्य के अंदर होती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सोहम नहीं दासोहम कहना चाहिए।
काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर ही मनुष्य की कमियां हैं। उन्होंने कहा कि भगवान को भूलने का नाम ही मृत्यु है। उन्होंने मानसिक पूजा की बात करते हुए एक श्लोक का उदाहरण दिया, जिसमें शिव स्तुति करते हुए कहा गया है कि मेरी आत्मा आप ही हो, पार्वती जी बुद्धि, सहचर प्राण आपके गण हैं, शरीर ही एक मंदिर है।