लायन सफारी से अभी कैनाइन डिस्टेंपर के संक्रमण का खतरा पूरी तरह से टला भी नहीं है कि भालू सफारी पर नया संकट छा गया है। सफारी के चार भालुओं में से दो को टीबी हो गई है। इस बात का खुलासा मथुरा भेजे गए भालुओं के ब्लड सैंपल की रिपोर्ट से हुआ है। सफारी प्रशासन ने आवीआरआई बरेली के पशु विशेषज्ञों को बुलाकर भालुओं का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया गया है। दोनों भालुओं का एक बार फिर से ब्लड सैंपल लेकर आवीआरआई बरेली जांच के लिए भेजा गया है।
इटावा सफारी पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर संक्रमण से अभी तक कई एशियाटिक शेरों की जान जा चुकी है। चूंकि सफारी पार्क सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव व सपा प्रमुख का ड्रीम प्रोजेक्ट है तो ऐसे में सपा की सरकार मेें सफारी शासन की वरीयता में रहा और देश ही नहीं कई देशों के डाक्टरों और पशु विशेषज्ञों को सफारी बुलाकर कैनाइन डिस्टेंपर के संक्रमण पर लगभग काबू पा लिया गया। लेकिन अब भालू सफारी में टीबी की दस्तक ने सफारी प्रशासन को हिला दिया है। भालू सफारी में लाए गए चार भालुओं शंकर, कालिया, भोला व मादा कुन्नी में से भोला और कुन्नी में टीबी का संक्रमण पाया गया है। भालुओं को टीबी है ये बात तब सामने आई, जब सफारी पहुंचे मथुरा वेटनरी अस्पताल के पशु विशेषज्ञ ने भालुओं के ब्लड सैंपल की जांच की। ब्लड रिपोर्ट में भोला और कुन्नी में टीबी का संक्रमण पाया गया। गुरुवार को आईवीआरआई बरेली के पशु विशेषज्ञों को भी सफारी बुलाया गया। बरेली के पशु विशेषज्ञों ने अपने स्तर से भालुओं का उपचार शुरू कर दोबारा ब्लड सैंपल लिए।
उड़ीसा व रांची से लाए गए थे भोला और कुन्नी
इटावा। टीबी के संक्रमण का शिकार हुए भालू भोला को 6 मार्च 2017 को रांची से लखनऊ जू में शिफ्ट किया गया था। जबकि मादा भालू कुन्नी को नंदन कानन से इसी दिन लखनऊ लाया गया। यहां से इन्हें 3 अप्रैल 2017 को इटावा सफारी पार्क लाया गया। इनके साथ ही भालू शंकर और कालिया को भी सफारी में शिफ्ट कर दिया गया था। जिसके बाद उन्हें 21 दिन तक क्यूरिटाइन में रखा गया और इसके बाद भालू सफारी के एनिमल हाउस में पहुंचा दिया गया। हाल ही में सफारी प्रशासन भालू सफारी तैयार होने के बाद भालुओं को सफारी में छोड़ने की तैयारी कर रहा थी।
कहीं भालुओं को सफारी पहुंचाने से पूर्व तो नहीं बरती गई लापरवाही
इटावा। इटावा सफारी पार्क के भालुओं में टीबी का संक्रमण लापरवाही का भी नतीजा हो सकता है। पशु विशेषज्ञों मान रहे हैं कि होे सकता है कि भालुओं को टीबी सफारी में पहुंचने से पहले रही हो और जल्दबाजी में भालुओं को सफारी में शिफ्ट करने में जांच में लापरवाही बरती गई हो। जिसका नतीजा आज सफारी को भुगतना पड़ रहा है।
आईवीआरआई की रिपोर्ट का इंतजार: पीपी सिंह
इटावा। इटावा सफारी पार्क के डायरेक्टर पीपी सिंह का कहना है कि मथुरा से आई ब्लड रिपोर्ट में भोला और कुन्नी भालू में टीबी का संक्रमण सामने आया है। इसके बाद आईवीआरआई बरेली के विशेषज्ञों को भी बुलाया जा चुका है और उनके द्वारा लिए गए ब्लड सैंपल की रिपोर्ट आने का इंतजार है। अगर आईवीआरआई की रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो वह उच्चाधिकारियों को संक्रमित भालुओं को सफारी से हटाने के लिए पत्र लिखेंगे। जिससे अन्य जानवरों को इस संक्रमण से बचाया जा सके। साथ ही वह उक्त मामले की गहराई से जांच भी करेंगे कि भालू टीबी के संक्रमण की चपेट में कैसे आए। इसके साथ ही आईवीआरआई क ी सलाह पर भालुओं का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया गया है। डा गौरव श्रीवास्तव को भालुओं के देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।