जसवंतनगर। आचार्य मुकेश शास्त्री ने कहा कि मनुष्य प्रभु का दास बनने का प्रयास करें क्योंकि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड़ कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौड़े चले आते हैं। गृहस्थ जीवन में मनुष्य तनाव में जीता है जब कि संत सद्भाव में जीता है। यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ क्योंकि संतोष सबसे बड़ा धन है।
घनश्यामपुरा गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह कार्यक्रम के समापन के बाद भंडारा कार्यक्रम में मौजूद भगवत प्रेमियों के बीच मौजूद थे। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। परीक्षित फूलनश्री-गंगा सिंह यादव और लक्ष्मी देवी-हाकिम सिंह यादव की अगुवाई में भंडारे का आयोजन किया गया। यज्ञ कर्ता बलराम यादव ने साधु संतों का सम्मान किया।