पंचायत चुनावों की मतगणना में प्रत्याशियों और एजेंटों के लिए कोरोना की निगेटिव जांच रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। डीएम के इस आदेश के बाद बुधवार को सुबह से ही कोरोना की जांच कराने वालों की संख्या में एकदम इजाफा हो गया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसईनावर में जांच के दौरान हंगामा हुआ। इसके बाद कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। सैफई उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में सैकड़ों की संख्या में लोग कोरोना की जांच कराने पहुंचे।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैफई और महेवा सीएचसी में भी प्रत्याशियों व उनके समर्थकों की जांच कराने के लिए खासी भीड़ उमड़ी।
महेवा सीएचसी अधीक्षक डॉ. गौरव त्रिपाठी ने बताया कि दोपहर एक बजे तक 200 से अधिक लोगों के सैंपल लिए जा चुके थे। सरसईनावर सीएचसी पर जांच कराने के लिए दबंगों ने कर्मचारियों पर दबाव बनाया।
इसके बाद जांच बीच में रोकनी पड़ी। इसी बीच कुछ दबंग अस्पताल में घुसकर पहले जांच करने का दबाव बनाने लगे। इस पर अस्पताल के कर्मचारियों ने जांच बंद कर दी।
चिकित्साधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि अचानक लोगों के आ जाने से कोविड के मानकों की अनदेखी हो रही थी। सीएचसी पर एक दिन में अधिकतम 100 आरटीपीसीआर जांच हो सकती है। उन्होंने बताया शेष लोगों को गुरुवार को बुलाया गया है।
दो मई को होने वाली मतगणना में प्रत्याशी व उनके अभिकर्ता की कोरोना की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट 24 घंटे में दिए जाने की मांग की गई है। जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव सतीश नागर ने मतगणना में घपले की आशंका व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि मतगणना के पूर्व ब्लॉक मुख्यालय पर ही कैंप लगाकर प्रत्याशी व उसके एजेंट की एंटीजन जांच कराई जाए। थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर की भी व्यवस्था हो।