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बाइकों की भिड़ंत में युवक की मौत

Fri, 10 May 2019 12:43 AM IST
प्रतीक दुबे इटावा, अमर उजाला ब्यूरो
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कुलदीप की फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
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थाना क्षेत्र के अंतर्गत इटावा रोड पर बुधवार की शाम को गांव सीपुरा के सामने बाइकों की भिड़ंत में घायल हुए युवक की सैफई मिनी पीजीआई में मौत हो गई। युवक की मौत की सूचना जैसे ही उसके परिवार के लोगों को मिली तो परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम कराया है।
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क्षेत्र के गांव बहारपुरा निवासी कुलदीप कुमार (25) पुत्र लाखन सिंह पूर्ति विभाग में संविदा कर्मी के रूप में काम करता था। बुधवार की शाम को अपने साथी सतीश निवासी बहारपुरा के साथ बाइक से घर लौट रहा था। सीपुरा के पास सामने से आ रही एक बाइक से उसकी भिड़ंत हो गई। इस हादसे में कुलदीप सतीश के अलावा दूसरी बाइक पर सवार अन्य दो लोग घायल हो गए थे। हादसे में कुलदीप को गंभीर चोट आई थी।

उसे पहले जिला अस्पताल भेजा गया जहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डाक्टरों ने पीजीआई भेज दिया। इलाज के दौरान कुलदीप की मौत हो गई। कुलदीप की मौत होने की जानकारी जैसे ही परिजनों को लगी तो परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद जब उसका शव गांव पहुंचा तो पूरे गांव में शोक का वातावरण हो गया। उसकी मौत से पत्नी व परिवार के लोगों का रो रो कर बुरा हाल था। गांव के लोग परिवार को ढांढस बंधा रहे थे।
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कुलदीप की शादी की पहली वर्षगांठ के दूसरे रोज ही पति की मौत की सूचना से पत्नी व बुजुर्ग मां पर दुख का पहाड़ टूट पडा। ग्राम बहारपुर स्थित आवास पर परिजनों सहित आसपास महिलाएं के मार्मिक विलाप से माहौल शोकाकुल बना रहा।

गुरुवार की भोर होते ही उपचार के दौरान कुलदीप की मौत हो जाने की खबर जैसे ही घर पहुची घर में मौजूद पत्नी नीरू व बूढ़ी मां शांतिदेवी को मिली तो वह बेहोश होकर गिर पड़ी। लोगों ने पानी डालकर उन्हें होश में लाया। वहां एकत्र महिलाओं के बीच पत्नी नीरू व शांति देवी का मार्मिक विलाप से मौजूद लोगों की आंखें नम बनी रही। साढ़ू आशीष ने बताया कि 6 मई 2018  को कुलदीप की शादी हुई थी। एक साल  वर्ष पूर्व पिता लाखन सिंह जो कि पीडब्लूडी में कार्यरत थे उनके निधन के बाद से कुलदीप जिला आपूर्ति विभाग में संविदा पर कार्य कर परिवार का भरण पोषण करने लगा  था। बड़ा भाई प्रदीप पिता की सेवाकाल के दौरान निधन होने पर मृतक आश्रित के रूप में उसी विभाग में कार्यरत है।
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