तीन वर्ष पहले बकेवर थाना क्षेत्र के ग्राम नगला मंजू में महिला व उसके चचेरे देवर के शव लटके पाए जाने के मामले में मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिलीप कुमार यादव ने दोषी महिला समेत तीन लोगों को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। ये लोग दोनों की हत्या कर शव लटकाने के दोषी पाए गए। वहीं गांव के एक व्यक्ति के पास से मृतक के मोबाइल की बरामदगी होने पर उसे तीन वर्ष की सजा सुनाई गई।
मामला 10 दिसंबर 2015 की है। बकेवर थाना क्षेत्र के ग्राम नगला मंजू में प्रीति पत्नी कोमल सिंह व उसके चचेरे देवर सोनू पुत्र रामदास के शव पेड़ लटके पाए गए थे। शासकीय अधिवक्ता शिवकुमार शुक्ला के अनुसार मामले में गोवर्धनलाल पुत्र आत्माराम निवासी नगरिया पोस्ट समायन थाना एरवाकटरा औरैया ने बकेवर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसने अपनी पुत्री प्रीति का विवाह नगला मंजू निवासी कोमलसिंह के साथ किया था। कुछ समय बाद कोमल सिंह की रेल हादसे में मौत हो गई थी। प्रीति के एक पुत्र व पुत्री थी। दोनों को लेकर वह ससुराल में रहती थी। बाद में प्रीति अपने चचेरे देवर सोनू पुत्र रामदास के साथ सामंजस्य बनाने का विचार कर रहे थे किंतु प्रीति के ससुर विजय सिंह, जेठ सामेंद्र व रंजीत तथा जिठानी आशा देवी इस निर्णय के खिलाफ थे। इसके ही चलते 10 दिसंबर 2015 को इन लोगों ने मिलकर प्रीति व सोनू की हत्या कर गांव के खेत में आम के पेड़ पर शव लटका दिए थे।
विवेचना के दौरान जहां पुलिस ने ससुर विजय सिंह को निर्दोष पाते हुए मामले से बाहर कर दिया वहीं मृतक सोनू का मोबाइल गांव के मंगलसिंह के पास से बरामद किया गया था। फलस्वरूप उसे भी आरोपी बनाया गया। पुलिस ने सामेंद्र, रंजीत, आशा व मंगल के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता शिवकुमार शुक्ला अपनी दलीलों के जरिए वाद को सिद्ध करने में सफल रहे। जिला सत्र न्यायाधीश दिलीप कुमार यादव ने सोमेंद्र, रंजीत व आशा को हत्या का दोषी पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई साथ ही एक लाख का जुर्माना लगाया। वहीं मंगल सिंह को तीन वर्ष की सजा सुनाई।