उप संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय में रविवार को फर्जी कागजात बनाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद से अभी तक कामकाज शुरू नहीं हो सका है। इस मामले में पुलिस ने एआरटीओ प्रवर्तन मोहम्मद अजीम व एआरटीओ प्रशासन हिमांशु जैन के अलावा गैंग के सरगना व प्राइवेट कर्मी प्रदीप गुप्ता को गिरफ्तार कर लखनऊ में अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। साथ ही कार्यालय को सीज कर दिया। दो दिन बाद भी मंगलवार को कार्यालय के ताले नहीं खुले। इससे वाहन स्वामियों को मायूस लौटना पड़ा। कोई यह भी बताने वाला नहीं है कि आखिर कब तक एआरटीओ दफ्तर खुलेगा। दोनों एआरटीओ की गिरफ्तारी के बाद से विभाग के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के मोबाइल भी स्विच ऑफ हैं। इनमें से कई कर्मचारी भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं।
उप संभागीय परिवहन विभाग में सरगना प्रदीप गुप्ता ही रैकेट चलाता था। वह अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी परमिट भी बनवाता था। इस सूचना के बाद अधिकारियों ने रविवार को कार्यालय में छापा मारकर प्रदीप गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस की पूछताछ में उसने अपने राज उगल दिए। इसके बाद एआरटीओ प्रवर्तन मोहम्मद अजीम के अलावा एआरटीओ प्रशासन हिमांशु जैन को गिरफ्तार कर लिया था जबकि कार्यालय में परमिट पटल को संभालने वाली बेबी फरार हो गई। पुलिस ने उसके घर से कैश, अस्थाई परमिट व टैक्स काटने की बुकलेट आदि बरामद किया है। सोमवार भी दफ्तर पर ताला लगा था। मंगलवार को सुबह काफी लोग कार्यालय पहुंचे। वहां ताला देखकर काफी देर तक खड़े रहे लेकिन जब कोई नहीं पहुंचा तो लोग चले गए। यह भी जानकारी नहीं मिली है कि कार्यालय में कब से कामकाज शुरू होगा।