जसवंत नगर (इटावा)। पत्नी के दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराने से तनाव में आए युवक ने पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर से खुद को दो गोलियां मारकर जान दे दी। परिजनों का कहना है कि युवक को अपने साथ ही माता-पिता के भी जेल जाने का डर सता रहा था। इसी से आत्मघाती कदम उठाया। कोतवाली प्रभारी जीवाराम यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में डिप्रेशन में जान देने की बात सामने आई है।
सोमवार रात की यह घटना जसवंतनगर थाने के खेड़ा बुजुर्ग गांव की है। यहां के शिवकांत चौधरी के पुत्र आलोक कुमार (33) की शादी 2013 में आगरा के थाना खेड़ा राठौर के गांव साबरमऊ निवासी शिवराम की बेटी जूली से हुई थी। वह करीब साल भर ससुराल में रही। इस बीच रिश्ते में खटास आई तो मायके चली गई। इनकी कोई संतान नहीं है। जूली ने जुलाई 2017 में आलोक व उसके माता-पिता के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज करा दी। आलोक के परिजनों के मुताबिक रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से पूरा परिवार तनाव में था। सोमवार रात खाना खाने के बाद घरवाले बरामदे में सो रहे थे। रात करीब तीन बजे आलोक उठा और संदूक में रखी पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर लेकर मकान के पीछे पुराने कमरे में जाकर एक गोली गर्दन और दूसरी गोली सीने में मार ली। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
गोलियां चलने की आवाज सुनकर माता-पिता और गांव के लोग मौके पर पहुंचे तो वहां आलोक खून से लथपथ पड़ा था। रिवाल्वर उसके दाहिने हाथ में थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। रिवाल्वर को सील कर दिया गया है। कोई भी खुद को लगातार दो गोलियां कैसे मार सकता है, यह सवाल उठाए जाने पर कोतवाली प्रभारी जीवाराम यादव ने कहा कि ऐसा संभव है, क्योंकि रिवाल्वर की गोली बंदूक या राइफल जितनी पावरफुल नहीं होती। उन्होंने बताया कि गर्दन में लगी गोली आरपार हो गई थी। सीने में लगी गोली पार नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तस्वीर और साफ हो जाएगी। घरवाले भी आत्महत्या ही बता रहे हैं। फिर भी अन्य बिंदुओं पर भी जांच की जाएगी।