नगरीय क्षेत्र में एसजेएसआरवाई के तहत लाभांवित किए गए पांच स्वयं सहायता समूहों के बैंक खातों से 25 लाख रुपये निकाले जाने का मामला प्रकाश में आया है। समूहों की अध्यक्ष महिलाआें ने शुक्रवार को जिलाधिकारी से गुहार लगाई। कहा कि इस जालसाजी में विभागाें के अधिकारी भी शामिल हैं। जिलाधिकारी ने महिलाओं को कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मामले में जालसाजी करने वाले एक व्यक्ति का नाम भी महिलाओें ने खोला है।
एसजेएसआरवाई (स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना) के तहत पांच समूहाें का गठन कर नगरीय विकास अभिकरण ने विभिन्न बैंकों को भेजा था। ऋण स्वीकृत हो जाने के बाद एक दलाल ने उक्त महिला स्वयं सहायता समूहों के अध्यक्ष तथा कोषाध्यक्षों से सादे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए। दो-दो फोटो और पहचानपत्र भी ले लिए।
महिलाओं का आरोप है कि उनको जानकारी दिए बगैर ही उनके खाते बैंकों में खु़लवा लिए गए। डाक से आने वाली जानकारी भी उन्हें नहीं मिली। उनके खातों से पूरे रुपये निकाल लिए गए। बाद में जब उन्हें पता चला कि उनके समूहों को ऋण दिया जा चुका है तब वे सन्न रह गईं। बैंकों में जाकर खाते देखे तो पता चला है कि उनमें से पैसा निकाल लिया गया है।
खाता कैसे खोले गए किसने पैसे निकाल लिए गए इसकी महिलाओं को भनक तक नहीं लगी। एसजेएसआरवाई के तहत 35 प्रतिशत अनुदान डूडा से तथा 5 प्रतिशत मार्जिन मनी लाभार्थी के द्वारा जमा की जाती है। 60 प्रतिशत पैसा बैंक के द्वारा समूह को ऋण के रूप में दिया जाता है।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का रोना यह है कि उन्हें पैसा तो एक भी नहीं मिला, और वे तीन-तीन लाख की कर्जदार हो गईं। महिलाओं का आरोप है कि इसकी जांच की जाए तो बैंक अधिकारियों व डूडा के लोगों की मिलीभगत सामने आएगी। आरोप लगाने वाली महिलाआें में नगीना पत्नी इरफान, शबीना पत्नी सरफराज, नाजरा पत्नी इमरान, रिहाना पत्नी सईद खां, मुनीसा पत्नी रफीक, नजमा पत्नी रिजवान निवासी शाहग्रान आदि प्रमुख है।