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ग्रामीणों के भरोसे वन्य जीवों की सुरक्षा

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इटवा। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए सेंचुरी विभाग के पास नाकाफी इंतजाम हैं। शिकारियों की दस्तक के बाद यहां के अफसर अब आसपास के गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं और उन्हीं से मदद मांग रहे हैं।
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दरअसल, क्षेत्र के क्वारी नदी के किनारे 13 अक्तूबर को मृत मिले तेंदुए की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर चोट से शिकारियों की दस्तक का अंदाजा लगाकर विभाग सतर्क हो रहा है। वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए मानव वन्य जीव संघर्ष जागरुकता अभियान की शुरुआत की गई है। इसके लिए जागरुकता और पेट्रोलिंग वैन चलाई जा रही है। वैन पर तैनात कर्मचारी गांव-गांव जाकर लोगों को जीवों के महत्व को समझाने और उन्हें बचाने की अपील कर रहे हैं। खतरनाक जानवरों से अपनी सुरक्षा करने के उपाय बताने के साथ शिकारियों को पकड़ने में लोगों से मदद मांगी जा रही है। जानवरों और शिकारियों की जानकारी देने के लिए अधिकारी अपने नंबर गांव वालों को बता रहे हैं।
कानून व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए पुलिस ड्रोन कैमरों जैसी आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन दुर्लभ वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए सेंचुरी विभाग गांव वालों की नजरों का इस्तेमाल कर रही है। सेंचुरी के कर्मचारियों का कहना है कि वन विभाग के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में आने-जाने वालों की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। घातक जानवरों से बचाव के लिए विभाग हथियार तक मुहैया नहीं करवा पा रहा। इसकी वजह से कर्मचारी लाठी डंडे से लैस होकर झुंड में जानवरों की सुरक्षा के लिए जंगल में गश्त करते हैं।
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घड़ियाल, मगरमच्छ, डालफिन सहित सैकड़ों प्रजाति के संरक्षित जलीय जीवों का कुनबा चंबल नदी में लगातार बढ़ रहा है। इन जीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर इस क्षेत्र में मोटर बोट के संचालन को प्रतिबंधित किया गया है। इसके बाद भी विभाग खुद यहां मोटर बोट चलवा रहा है। सेंचुरी के रेंजर हरिकिशोर शुक्ला कहना है कि आए दिन माननीयों का दौरा होता है। उन्हें नौका विहार करवाने और नदी में शिकारियों को रोकने के लिए मोटर बोट चलाया जाता है। उनका कहना है कि जीवों की सुरक्षा के लिए गश्त किया जाता है। लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
सेंचुरी में दुर्लभ तेंदुओं की रहस्यमयी मौत का सिलसिला लगातार जारी है। हर महीने एक से दो तेंदुओं का शव किसी न किसी क्षेत्र में पाया जा रहा है। 13 अक्तूबर को क्वारी नदी के किनारे मिले तेंदुए के पोस्टमार्टम से विभाग थोड़ा सक्रिय हुआ। इसके पहले 10 अगस्त को खिरीटी गांव के प्राथमिक स्कूल के निर्माणाधीन में किचन में मरा हुआ तेंदुआ मिला था। 31 मार्च को बिंडबा गांव में तेंदुए का शव मिला था। छानबीन में करंट लगने से इसके मौत की पुष्टि हुई थी।
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