इटावा। पिछले करीब दो सप्ताह से कोहरे और धुंध की वजह से ट्रेनों की लेट लतीफी अभी भी जारी है। बृहस्पतिवार को नई दिल्ली से लखनऊ जा रही स्वर्ण शताब्दी, नार्थ ईस्ट, महानंदा और बीकानेर-हावड़ा एक्सप्रेस की चाल में कुछ सुधार तो दिखा लेकिन कैफियत और अवध जैसी ट्रेनें 12 से 15 घंटे देरी से आईं। इससे यात्रियों को खासी परेशानी भी हुई।
ग्वालियर-इटावा ट्रेन निर्धारित समय से तीन मिनट पहले आई। लेकिन आगरा- लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस पांच घंटे की देरी से आई। एमसीटीसी करीब पौने नौ घंटे की देरी से आई। टूंडला- कानपुर मेमू एक घंटा देरी से आई। जबकि कानपुर की ओर से आने वाली ट्रेनों में कैफियत 12 घंटे, अवध एक्सप्रेस करीब 15 घंटे देरी से आईं। गोमती एक्सप्रेस करीब एक घंटा देरी से आई।
बस अड्डे पर बसें तो खड़ीं दिखीं लेकिन यात्रियों का टोटा रहा। आगरा, कानपुर, फर्रुखाबाद, मैनपुरी की बसें खड़ी रहीं। बृहस्पतिवार को कम यात्री आने की वजह से रोजाना की बसों की निगरानी करने के अलावा आरएम और एआरएम भी कार्यालय में काम निपटाते रहे। डीएम सक्सेना ने बताया कि प्रत्येक बृहस्पतिवार को यात्री कम ही सफर करते हैं। इस वजह से बस अड्डा पर सन्नाटा रहा। ऐसे में ज्यादातर यात्री एक दिन पहले या बाद में सफर करते हैं।