प्रदर्शनी पंडाल में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह का फूलों की होली के साथ समापन हो गया। शनिवार को भागवताचार्य मृदुल कृष्ण महाराज ने भजन गाए, जिन पर श्रोता मगन होकर झूमते रहे। बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन है गयो लटा पटा पर श्रोताओं ने अपने स्थान पर उठकर नृत्य किया। समूचा पंडाल भक्ति बयार में बहता नजर आया।
इससे पूर्व आचार्य श्री ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में कितनी भी धन ऐश्वर्य की समानता हो, लेकिन यदि मन में शांति नहीं है तो वह व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता। इसके उलट यदि किसी के पास धन की कमी भले हो, लेकिन यदि मन शांत है तो वह परम सुखी है।
सुदामा निर्धन थे, मगर वह सदैव शांत रहते थे। उनके पास प्रभुनाम रूपी धन था, जिससे वह खुद को सुखी महसूस करते थे। आचार्य श्री ने कहा कि इस प्रसंग का सार यह है कि हम सब अपना मूल्य समझें और विश्वास करें कि हम संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं तो हमेशा क्रियाशील बने रहेंगे।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सम्मान अमीरी से नहीं, ईमानदारी और सज्जनता से प्राप्त होता है। इसके बाद पंडाल में फूलों की होली की ऐसी धूम मची कि पूरा पंडाल ब्रजरस से सराबोर हो गया। कथा के यजमान दंपति मोहित दुबे व रूबी दुबे ने श्रीमद्भागवत पुराण का पूजन किया।
आरती में कन्नौज सांसद प्रतिनिधि नवाब सिंह यादव, अनुराग मिश्रा, एएसपी सर्वानंद सिंह यादव, महेंद्र सिंह चौहान, संत अमरनाथ दीक्षित, सुनीता दीक्षित, कथा रसिक हरिदास, जनमेजय सिंह भदौरिया, चंद्र प्रकाश गुप्ता शामिल रहे। जबकि लालू दुबे, अरविंद यादव, रमेश भदौरिया, भोले द्विवेदी, सोनू द्विवेदी आदि व्यवस्था संभाले रहे।