करनगर में खेत में पसरी बाजरा की फसल। संवाद
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इटावा/ बकेवर/चकरनगर/ महेवा। बुधवार और गुरुवार को हुई बारिश ने बाजरा, धान और उड़द का नुकसान बढ़ा दिया है। दो दिन की बारिश में बाजरे की 43 सौ व धान की साढ़े छह हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। उड़द की 100 हेक्टेयर की फसल को नुकसान हुआ है।
जनपद में बाजरे का 43 हजार और धान का 42 हजार हेक्टेयर धान का रकबा है। उड़द 400 हेक्टेयर भूमि पर की गई है। दो सप्ताह पहले 21 व 22 सितंबर को हुई बारिश से बाजरे की आठ हजार और उड़द की 200 हेक्टेयर फसल का नुकसान हुआ था। हालांकि उस वक्त धान को मामूली नुकसान माना गया था। बुधवार से शुरू हुई बारिश में बाजरे की 4300 व धान की साढ़े छह हजार हेक्टेयर फसल का नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने की वजह से पकी धान फली गिर गई हैं। वहीं जिस धान की अभी बाली आई है, उसे वह भी झड़ने की आशंका है। किसानों का मानन है कि खेतों में भरा पानी निकलने से पहले यदि धूप निकल आई तो यह नुकसान और बढ़ सकता है। उधर, सरसों और आलू की बुआई 10 से 20 तक दिन तक देरी से हो पाएगी।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि आलू की अगेती कच्ची खोद वाली फसल की बुआई बारिश के कारण आधी से भी कम हो पाई। 400 हेक्टेअर कच्ची खोद आलू का रकवा है। पक्की फसल समय पर ही होगी। अभी 15 से 20 दिन का समय है, तब तक खेतों के पानी सूख जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल ने बताया बारिश से बाजरा की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन दाना काला पड़ने से उसकी कीमत कम हो जाएगी। उड़द और मूंग की फसल जिनकी फलियां पक गईं हैं, 30 से 50 प्रतिशत नुकसान होने की आशंका हैं। ऐसी स्थिति में फसल को काट कर सुखा लें अन्यथा जम जाएंगी। बाजार भाव कम हो जाएगा।
किसान छंगे ठाकुर का कहना है अभी उनके खेतों में काफी पानी भरा है। उसे सूखने में ही 10 से 15 दिन लग जाएंगे। उसके बाद खेत में जुताई के लायक नमी आने में चार- पांच दिन लगेंगे। बाजरे की फसल को भी नुकसान हुआ है। चकरनगर के ग्राम वंशरी निवासी किसान कृष्ण बिहारी दुबे ने बताया पानी और हवा ने बाजरा की फसल आधे से अधिक खराब हो गई है। सरसों की बुआई भी प्रभावित होगी। आर्थिक नुकसान से बच नहीं पाएंगे।
बारिश होने से हुए नुकसान का पता सर्वे होने के बाद ही चल सकेगा। अभी फिलहाल सरसों की बुवाई देरी से हो पाएगी। खेतों में पानी निकलने के बाद ही मौसम खिले तो बेहतर रहेगा।
कुलदीप राणा, जिला कृषि अधिकारी